वैशाली एक्सप्रेस का मार्ग बदलने की तैयारी!
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Feb 2016 4:12 AM (IST)
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पाटलीपुत्र, दानापुर, मुगलसराय रूट से वैशाली एक्सप्रेस को चलाये जाने की सूचना रेल सूत्रों से मिली है. यदि मार्ग बदला गया, तो उत्तर बिहार व यूपी के कई इलाकों के लोगों को परेशानी हाेगी, क्योंकि दिल्ली जाने के लिए यह प्रमुख ट्रेन है. उत्तर बिहार की सबसे प्रमुख ट्रेन वैशाली एक्सप्रेस के नये रेल बजट […]
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पाटलीपुत्र, दानापुर, मुगलसराय रूट से वैशाली एक्सप्रेस को चलाये जाने की सूचना रेल सूत्रों से मिली है. यदि मार्ग बदला गया, तो उत्तर बिहार व यूपी के कई इलाकों के लोगों को परेशानी हाेगी, क्योंकि दिल्ली जाने के लिए यह प्रमुख ट्रेन है.
उत्तर बिहार की सबसे प्रमुख ट्रेन वैशाली एक्सप्रेस के नये रेल बजट के अनुसार मार्ग परिवर्तित करने की सूचना है. पूर्व मध्य रेलवे के विभागीय सूत्रों की माने तो इस ट्रेन को बरौनी से खुलने के बाद मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, सोनपुर के बाद दीघा ब्रिज होते पाटलीपुत्र, दानापुर, मुगलसराय रूट से चलाये जाने की तैयारी है. इस संबंध में पूर्व मध्य रेलवे के विभागी सूत्रों की माने तो आधा दर्जन ट्रेनों के मार्ग पहलेजा दीघा रेल ओवरब्रिज के बीच से का मार्ग बदलने का प्रस्ताव बोर्ड को भेजा गया है.
छपरा-सीवान : देवरिया, गोरखपुर के यात्रियों को होगी परेशानी : पूर्व मध्य रेलवे के अधिकृत सूत्रों के अनुसार यदि इस ट्रेन का मार्ग बदला जाता है तो निश्चित तौर पर छपरा जंकशन, सीवान जंकशन, देवरिया, गोरखपुर, खलिला बाद, गोंडा बस्ती, बाराबंकी होते दिल्ली जाने वाले यात्रियों को एक महत्वपूर्ण ट्रेन से यात्रा करने से वंचित होना पड़ेगा. वहीं, नये मार्ग के तहत यह ट्रेन चली तो यह सोनपुर पाटलीपुत्र, दानापुर, मुगलसराय रूट से नयी दिल्ली जायेगी. बरौनी से नयी दिल्ली के बीच 1187 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन 21 घंटे में तय करती है.
1983-84 में जयंती-जनता एक्सप्रेस के नाम से शुरू हुई थी वैशाली एक्सप्रेस : पूर्वोत्तर रेलवे के तत्कालीन महाप्रबंधक डी हरिराम के प्रयास से ही यह ट्रेन वित्त वर्ष 1983 में इस मार्ग में प्रारंभ हुई थी. इसका नाम रेलवे बोर्ड ने बाद में बदलकर संपूर्ण विश्व के प्रथम गणराज्य बनने का गौरव हासिल करने वाले वैशाली गणराज्य के नाम पर वैशाली एक्सप्रेस रखा गया था.
इस सुपरफास्ट ट्रेन से यात्रा के लिए आज भी सारण प्रमंडल व यूपी के दर्जन भर जिलों के यात्री अपनी पहली प्राथमिकता के रूप में चयनित करते है.
यदि वैशाली का मार्ग बदला, तो होगा विरोध
पश्चिमोत्तर बिहार वाणिज्य एवं उद्योग परिषद के सचिव पवन कुमार अग्रवाल ने इस तरह के किसी भी प्रकार के रेलवे के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि देश की राजधानी के लिए आने-जाने का उत्तर बिहार खासकर सारण प्रमंडल व यूपी के दर्जन भर जिलों के लोगों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन है. यदि ऐसा फैसला हुआ जिससे सारण के लोग उपेक्षित हुए तो इस फैसले के खिलाफ व्यवसायी व आम जन भी विरोध करेंगे.
रेलवे ने इस ट्रेन की दूरी कम करने के उद्देश्य व पूर्व मध्य रेलवे के पटना-दानापुर, मुगलसराय के यात्रियों को बेहतर सुविधा दिलाने के उद्देश्य से स्टुडेंट का मार्ग बदलने की योजना बनायी.
उत्तर बिहार की सबसे प्रमुख ट्रेन वैशाली एक्सप्रेस के नये रेल बजट के अनुसार मार्ग परिवर्तित करने की सूचना है. पूर्व मध्य रेलवे के विभागीय सूत्रों की माने तो इस ट्रेन को बरौनी से खुलने के बाद मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, सोनपुर के बाद दीघा ब्रिज होते पाटलीपुत्र, दानापुर, मुगलसराय रूट से चलाये जाने की तैयारी है. इस संबंध में पूर्व मध्य रेलवे के विभागी सूत्रों की माने तो आधा दर्जन ट्रेनों के मार्ग पहलेजा दीघा रेल ओवरब्रिज के बीच से का मार्ग बदलने का प्रस्ताव बोर्ड को भेजा गया है.
छपरा-सीवान, देवरिया, गोरखपुर के यात्रियों को होगी परेशानी : पूर्व मध्य रेलवे के अधिकृत सूत्रों के अनुसार यदि इस ट्रेन का मार्ग बदला जाता है तो निश्चित तौर पर छपरा जंकशन, सीवान जंकशन, देवरिया, गोरखपुर, खलिला बाद, गोंडा बस्ती, बाराबंकी होते दिल्ली जाने वाले यात्रियों को एक महत्वपूर्ण ट्रेन से यात्रा करने से वंचित होना पड़ेगा. वहीं, नये मार्ग के तहत यह ट्रेन चली तो यह सोनपुर पाटलीपुत्र, दानापुर, मुगलसराय रूट से नयी दिल्ली जायेगी. बरौनी से नयी दिल्ली के बीच 1187 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन 21 घंटे में तय करती है.
1983-84 में जयंती-जनता एक्सप्रेस के नाम से शुरू हुई थी वैशाली एक्सप्रेस : पूर्वोत्तर रेलवे के तत्कालीन महाप्रबंधक डी हरिराम के प्रयास से ही यह ट्रेन वित्त वर्ष 1983 में इस मार्ग में प्रारंभ हुई थी. इसका नाम रेलवे बोर्ड ने बाद में बदलकर संपूर्ण विश्व के प्रथम गणराज्य बनने का गौरव हासिल करने वाले वैशाली गणराज्य के नाम पर वैशाली एक्सप्रेस रखा गया था.
इस सुपरफास्ट ट्रेन से यात्रा के लिए आज भी सारण प्रमंडल व यूपी के दर्जन भर जिलों के यात्री अपनी पहली प्राथमिकता के रूप में चयनित करते है.
यदि वैशाली का मार्ग बदला, तो होगा विरोध
पश्चिमोत्तर बिहार वाणिज्य एवं उद्योग परिषद के सचिव पवन कुमार अग्रवाल ने इस तरह के किसी भी प्रकार के रेलवे के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि देश की राजधानी के लिए आने-जाने का उत्तर बिहार खासकर सारण प्रमंडल व यूपी के दर्जन भर जिलों के लोगों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन है. यदि ऐसा फैसला हुआ जिससे सारण के लोग उपेक्षित हुए तो इस फैसले के खिलाफ व्यवसायी व आम जन भी विरोध करेंगे.
रेलवे ने इस ट्रेन की दूरी कम करने के उद्देश्य व पूर्व मध्य रेलवे के पटना-दानापुर, मुगलसराय के यात्रियों को बेहतर सुविधा दिलाने के उद्देश्य से स्टुडेंट का मार्ग बदलने की योजना बनायी.
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