ए वन छपरा जंकशन पर नहीं है मानक के अनुरूप सुरक्षा

ए वन छपरा जंकशन पर नहीं है मानक के अनुरूप सुरक्षामुख्य प्रवेश-निकास द्वार पर सुरक्षा जांच का कोई प्रबंध नहीं72 जोड़ी ट्रेनों का होता है यहां आवागमन नोट: फोटो नंबर 28 सी.एच.पी 12,13 है कैप्सन होगा- सुरक्षा विहीन गेट से बाहर निकलते यात्री तथा स्टेशन के बाहरी परिसर में बैठे यात्री संवाददाता, छपरा (सारण)पूर्वोत्तर रेलवे […]
ए वन छपरा जंकशन पर नहीं है मानक के अनुरूप सुरक्षामुख्य प्रवेश-निकास द्वार पर सुरक्षा जांच का कोई प्रबंध नहीं72 जोड़ी ट्रेनों का होता है यहां आवागमन नोट: फोटो नंबर 28 सी.एच.पी 12,13 है कैप्सन होगा- सुरक्षा विहीन गेट से बाहर निकलते यात्री तथा स्टेशन के बाहरी परिसर में बैठे यात्री संवाददाता, छपरा (सारण)पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंकशन पर मानक के अनुरूप सुरक्षा प्रबंध नहीं है. वाराणसी मंडल का ए वन कलास का स्टेशन है, लेकिन यहां मुख्य प्रवेश-निकास द्वार पर सुरक्षा जांच का कोई प्रबंध नहीं है. प्रतिदिन यहां से करीब 72 जोड़ी ट्रेनों का आवागमन हाता है और 40 से 45 हजार यात्री सफर करते हैं. यहां से रेलवे को प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है. परंतु, इस लिहाज से सुरक्षा का प्रबंध नहीं किया गया है. मुख्य प्रवेश-निकास द्वार पर संदिग्धों की जांच नहीं होने से कभी किसी तरह की अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है. नहीं लगे सीसीटीवी कैमरेछपरा जंकशन पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर सुरक्षा का प्रबंध नहीं हो सका. यह योजना वर्ष 2008 में ही बनी थी. तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद के कार्यकाल में इस योजना को स्वीकृति दी गयी. लेकिन, उनके पद से हटते ही यह मामला खटाई में पड़ गया. इसी वर्ष पुन: इसका टेंडर निकाला गया, लेकिन आज तक टेंडर फाइनल नहीं हो सका. अब भी यह मामला फाइलों में अटका पड़ा है. नहीं हुई घेराबंदीस्टेशन की घेराबंदी करने की योजना को अब तक धरातल पर नहीं उतारा जा सका है. दो वर्ष पहले आरपीएफ के डीआइजी ने यह योजना बनायी थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के तर्ज पर स्टेशन की पूर्ण घेराबंदी करने की योजना बनी थी. लेकिन, फंड के अभाव में इसका कार्यान्वयन नहीं हो सका. सबसे दुखद पहलू यह है कि माल गोदाम की चहारदीवारी पूरी तरह टूट गयी है. घेराबंदी करने की योजना बनाने के बाद चहारदीवारी को मालवाहक वाहनों ने धक्का मार कर क्षतिग्रस्त कर दिया. इसके प्रति रेलवे प्रशासन उदासीन बना हुआ है. नहीं खुला यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्षपूर्वोत्तर रेलवे का पहला यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्ष वर्ष 2008 में चालू हुआ. इसके लिए एक अदद प्रभारी निरीक्षक की पदस्थापना की गयी. लेकिन यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्ष का आज तक भवन नहीं बना और ना ही पुलिस पदाधिकारियों की पदस्थापना की गयी. मजे की बात तो यह है कि यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्ष के प्रभारी निरीक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद रिक्त पड़ा हुआ है. क्या है यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्षयात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्ष में एक प्रभारी निरीक्षक, 10 उपनिरीक्षक, 20 सहायक उपनिरीक्षक, 20 हेड कांस्टेबुल समेत अन्य कांस्टेबुल को पदस्थापित करना है. एक साथ 10 कॉल आने तथा 10 कॉल जाने के लिए टेलीफोन सेवा उपलब्ध रहेगी, जिससे चलीं ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा का नियंत्रण किया जा सकेगा. लेकिन, इसके चालू नहीं होने से यात्री सुरक्षा का कार्य बाधित हो रहा है. वर्षों से रिक्त है सीआइबी इंस्पेक्टर का पदछपरा जंकशन पर आरपीएफ सीआइबी इंस्पेक्टर का पद वर्षों से रिक्त पड़ा है. रेलवे संपत्ति की सुरक्षा तथा यात्री सुरक्षा एवं आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखनेवाले सीआइबी के इंस्पेक्टर के नहीं रहने से सुरक्षा का कार्य बाधित हो रहा है. करीब दो वर्ष से यह पद रिक्त पड़ा है. एक-दो सिपाहियों के भरोसे यहां सीआइबी का कार्य चल रहा है. खास बातें-यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्ष के प्रभारी निरीक्षक का पद वर्षों से है रिक्त-सीआइबी इंस्पेक्टर के पद दो वर्ष से है रिक्त-प्रवेश-निकास द्वार पर नहीं लगा है फ्रेम डोर मेटल डिटेक्टर-छपरा जंकशन पर नहीं चालू हो सका यात्री सुरक्षा नियंत्रण कक्ष-स्टेशन की हवाई अड्डू के तर्ज पर नहीं हुई घेराबंदी -प्रवेश-निकास द्वार पर नहीं होती है जांच क्या कहतें है अधिकारी यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए पुन: टेंडर निकालने की योजना बनायी गयी है और आरपीएफ के पदाधिकारियों के रिक्त पदों को भरा जा रहा है. अशोक कुमार रेलवे जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे छपरा
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