प्रशक्षिण मिला, दर्जा भी मिला, नहीं मिला अधिकार

प्रशिक्षण मिला, दर्जा भी मिला, नहीं मिला अधिकार प्रभात पड़ताल आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा जन्म प्रमाणपत्र निर्गत करने के लिए शुरू की गयी थी कार्रवाई संवाददाता, छपरा (सारण)उपरजिस्ट्रार का दर्जा मिला. सरकार ने प्रशिक्षण भी दिया. मुहर भी बन गया. पंजी रजिस्टर भी मिल गयी. आवेदन तथा जन्म प्रमाणपत्र का प्रपत्र भी उपलब्ध हो गया. जन्म […]
प्रशिक्षण मिला, दर्जा भी मिला, नहीं मिला अधिकार प्रभात पड़ताल आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा जन्म प्रमाणपत्र निर्गत करने के लिए शुरू की गयी थी कार्रवाई संवाददाता, छपरा (सारण)उपरजिस्ट्रार का दर्जा मिला. सरकार ने प्रशिक्षण भी दिया. मुहर भी बन गया. पंजी रजिस्टर भी मिल गयी. आवेदन तथा जन्म प्रमाणपत्र का प्रपत्र भी उपलब्ध हो गया. जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन भी लोगों ने दाखिल करना शुरू कर दिया. लेकिन, उपरजिस्ट्रार को जन्म प्रमाणपत्र निर्गत करने का अधिकार नहीं मिला. इसको लेकर आंगनबाड़ी सेविकाओं की खूब फजीहत हो रही है. ग्रामीण क्षेत्र की सेविकाओं को यह अधिकार मिल गया है और वह कार्य भी कर रही हैं. लेकिन शहरी क्षेत्र की सेविकाओं को अब तक उपरजिस्ट्रार के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं मिला है. इसका खामियाजा जन्म पत्र बनवाने के लिए आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. इन क्षेत्रों के नागरिक हैं परेशान-छपरा नगर पर्षद-रिविलगंज नगर पंचायत-एकमा नगर पंचायत-दिघवारा नगर पंचायत-सोनपुर नगर पंचायत -मढ़ौरा नगर पंचायत -परसा बाजार नगर पंचायतक्या है उद्देश्य जन्म प्रमाणपत्र के निर्गत करने में होनेवाली परेशानी को दूर करनापुरानी व्यवस्था के तहत होनेवाले विलंब से बचनानगर पर्षद में कर्मचारियों की कमी के कारण होती है परेशानीबच्चों के नामांकन समेत अन्य कार्यों में जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक सर्वोच्च न्यायालय में जन्म प्रमाणपत्र सभी के लिए अनिवार्य रूप से लागू करने का दिया गया है निर्देशजन्म प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू करना राज्य सरकार की है जिम्मेवारीशहरी क्षेत्र में नगर निकाय तथा सरकारी अस्पतालों से जन्म प्रमाणपत्र निर्गत किया जाता हैकाम का दबाव अधिक रहने और कर्मचारियों की कमी के कारण जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदकों को महीनों चक्कर काटना पड़ता है. सेविकाओं की हो रही है फजीहतजन्म प्रमाणपत्र आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से निर्गत करने का जोर-शोर से प्रचार किया गया, लेकिन उन्हें अब तक यह अधिकार नहीं दिये जाने से काफी फजीहत हो रही है. आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषक क्षेत्र के नागरिक सेविकाओं के साथ इसको लेकर तू-तू मैं-मैं कर रहे हैं. रोज इस तरह की घटनाएं होती हैं. नागरिक सेविकाओं पर इस कार्य के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हैं. इतना ही नहीं, सेविकाओं पर जान-बूझ कर परेशान करने का भी आरोप लगाते हैं. इसके लिए पूर्व में सरकार तथा प्रशासन द्वारा की गयी घोषणा का हवाला भी देते हैं. सात माह से नहीं मिला मानदेयजिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं तथा सहायिकाओं को सात माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है. इस वजह से उन्हें आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है. लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण उन्हें कर्ज लेकर घरेलू कार्य चलाना पड़ रहा है. तीन वर्ष तक के बच्चों का पोषण व शिक्षण की जिम्मेवारी संभालनेवाली सेविकाओं व सहायिकाओं को अपने बच्चे की पढ़ाई इलाज में आर्थिक संकट बाधा बन रहा है. इसको लेकर सेविका-सहायिका संघ की ओर से कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया जा चुका है. हालांकि, अब तक मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है. क्या कहतें हैं अधिकारीशहरी क्षेत्र की आंगनबाड़ी सेविकाओं को उपरजिस्ट्रार के रूप में कार्य करने का आदेश निर्गत नहीं किया गया है. इसको लेकर सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाना है. सुष्मिता शर्मासीडीपीओ, रिविलगंज
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