छात्राओं पर पढ़ाई छोड़ने का दबाव

Published at :30 Jun 2015 7:41 AM (IST)
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छात्राओं पर पढ़ाई छोड़ने का दबाव

पार्ट वन के त्रुटिपूर्ण रिजल्ट से टूट सकता है कई छात्राओं का उच्च शिक्षा का सपना छपरा (नगर) : जेपीविवि में स्नातक की परीक्षाओं के रिजल्ट में रही त्रुटियों से वैसे तो सभी छात्र परेशान हैं, मगर विशेष रूप से वैसी छात्राएं परेशान हैं, जिन्होंने अपने परिजनों को जैसे-तैसे समझा कर स्नातक की पढ़ाई करने […]

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पार्ट वन के त्रुटिपूर्ण रिजल्ट से टूट सकता है कई छात्राओं का उच्च शिक्षा का सपना
छपरा (नगर) : जेपीविवि में स्नातक की परीक्षाओं के रिजल्ट में रही त्रुटियों से वैसे तो सभी छात्र परेशान हैं, मगर विशेष रूप से वैसी छात्राएं परेशान हैं, जिन्होंने अपने परिजनों को जैसे-तैसे समझा कर स्नातक की पढ़ाई करने के लिए उन्हें राजी किया था. अब उनके पास अपने परिजनों को यह बताने पर कि वे फेल नहीं हुई हैंबल्कि विवि की गलती से उन्हें प्रोमोटेड कर दिया गया है, समझाने में असमर्थ साबित हो रही हैं
अलबत्ता, स्थिति यह है कि कई छात्राओं के अभिभावक पढ़ाई छोड़ने का फरमान घर में सुना चुके हैं. ऐसी स्थिति में छात्राओं के समक्ष पढ़ाई छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है.
स्नातक में कम हो जाती है संख्या : मालूम हो कि जिले में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मैट्रिक व इंटरमीडिएट स्तर पर चलायी जा रहीं सरकारी योजनाओं तथा कुछ लोगों में आयी जागरूकता से मैट्रिक व इंटरमीडिएट में छात्राओं की संख्या बढ़ी है. इस बार सारण जिले से 10 वीं से उत्तीर्ण कुल 56 हजार 503 परीक्षार्थियों में से करीब 27 हजार 668 छात्राएं उत्तीर्ण हुईं हैं.
वहीं, इंटरमीडिएट में भी करीब 37 हजार से अधिक छात्राएं उत्तीर्ण हुई हैं. वैसे भी विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों की अधिकतर छात्राओं की पढ़ाई इंटरमीडिएट के बाद रोक दी जाती है. वहीं, कुछ अभिभावकों से लड़ कर या समझा कर एडमिशन ले भी रही हैं, तो उन्हें विवि की बेरुखी के कारण पढ़ाई छोड़ने को बाध्य होना पड़ रहा है.
अभी तक नहीं सुधरा पार्ट टू का भी रिजल्ट : विगत 22 जून को घोषित स्नातक पार्ट वन का रिजल्ट एक तो विवि द्वारा परीक्षा लेने के बाद करीब 10-11 माह के बाद जारी किया गया.
वहीं, रिजल्ट में व्यापक पैमाने पर त्रुटि का आरोप परीक्षार्थियों द्वारा लगाया जा रहा है. अधिकतर परीक्षार्थी, जो परीक्षा में शामिल हुए, उन्हें अनुपस्थित घोषित कर प्रोमोटेड घोषित किया गया है, तो काफी संख्या में छात्रों को कॉपी में लिखने के बावजूद फेल घोषित कर दिया गया है. छात्राओं की पढ़ाई छोड़ने का दूसरा कारण यह भी है. इसके पहले पार्ट टू के रिजल्ट में भी ऐसी गड़बड़ी मिली थी. हालांकि काफी दौड़-भाग के बाद भी छात्रों को नया अंक पत्र नहीं प्राप्त हो पाया है.
केस स्टडी एक :- अनुपम कुमारी ग्रामीण क्षेत्र मशरक की रहनेवाली है. इंटरमीडिएट के बाद छपरा में एक संबंधी के घर रह कर स्नातक की पढ़ाई कर रही थी. वह अगस्त, 2014 में विवि द्वारा आयोजित पार्ट वन की सभी परीक्षा में शामिल हुई. रिजल्ट घोषित हुआ, तो वह प्रोमोटेड थी. उसे सब्सिडयरी के एक पेपर में अनुपस्थित बताया गया था. बहरहाल, परिजन पढ़ाई छोड़ घर वापस घर लौटने का दबाव बना रहे हैं.
केस स्टडी दो :- अलका कुमारी शहर के प्रभुनाथ नगर में पिता के साथ रह कर जेपीएम कॉलेज में जूलॉजी ऑनर्स कर रही है. वह शुरू से ही मेधावी छात्र रही है. उसे पार्ट वन में भी अच्छा नंबर आने की उम्मीद थी.
रिजल्ट मिला, तो उसके होश उड़ गये. उसे ऑनर्स व सब्सिडयरी दोनों के एक -एक पेपर में फेल घोषित कर रिजल्ट प्रोमोटेड घोषित कर दिया गया है. बहरहाल, अब अपने रिजल्ट के कारण अपने पिता व दोस्तों के सामने शर्मिदगी ङोल रही है.
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