हजारों छात्र रह सकते हैं वंचित

Published at :24 Jun 2015 7:47 AM (IST)
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हजारों छात्र रह सकते हैं वंचित

जिले के सिर्फ 15 अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों में यूजी की होती है पढ़ाई छपरा (नगर) : मैट्रिक व इंटरमीडिएट का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही कॉलेज व प्लस टू स्कूलों में एडमिशन के लिए छात्रों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गयी है. वैसे मैट्रिक का मार्क्‍सशीट अभी स्कूलों में नहीं पहुंचा है. ऐसे […]

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जिले के सिर्फ 15 अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों में यूजी की होती है पढ़ाई
छपरा (नगर) : मैट्रिक व इंटरमीडिएट का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही कॉलेज व प्लस टू स्कूलों में एडमिशन के लिए छात्रों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गयी है. वैसे मैट्रिक का मार्क्‍सशीट अभी स्कूलों में नहीं पहुंचा है. ऐसे में इंटरमीडिएट में एडमिशन करानेवाले
छात्र मार्क्‍सशीट के इंतजार में हैं, तो कई छात्र-छात्राएं कॉलेज का सेलेक्शन व पहले से ही एडमिशन फॉर्म खरीद कर कॉलेज द्वारा निर्धारित अप्लाइ डेट पर नजर जमाये हुए हैं.
वैसे, उनका एडमिशन तो कन्फर्म ही है, क्योंकि जिले के 15 सरकारी कॉलेज, प्लस टू स्तर के सरकारी स्कूल तथा 40 से अधिक बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त प्लस टू स्कूलों में एडमिशन का अवसर है. सबसे ज्यादा टेंशन इंटरमीडिएट के बाद यूजी कोर्स में नामांकन कराने वाले छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ सकता है.
50 हजार से ज्यादा छात्र हुए हैं इंटर में उत्तीर्ण : इस बार सारण जिले से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करनेवालों की संख्या 50 हजार से अधिक है जबकि सारण जिले में जेपीविवि अंतर्गत मात्र 10 अंगीभूत तथा पांच संबद्ध कॉलेजों में ही यूजी कोर्स में नामांकन की सुविधा है.
उधर, कॉलेजों में सीटों की संख्या सीमित होने के कारण काफी संख्या में छात्रों को यूजीकोर्स में नामांकन से वंचित रहना पड़ेगा. विशेष रूप से इंटरमीडिएट में कम अंक लानेवालों के लिए इस बार नामांकन पाना जंग जीतने के बराबर साबित होगा.
प्रत्येक कॉलेज में सीट निर्धारित : वैसे जेपीविवि अंतर्गत सभी कॉलेजों में यूजी कोर्स में सीटों की संख्या पूर्व से ही निर्धारित है.
एक अनुमान के अनुसार, जेपीविवि के सबसे पुराने कॉलेजों में यूजी कोर्स में उपलब्ध सीटों की संख्या दो हजार के लगभग है. ऐसे में सिर्फ सारण जिले की ही बात करें, तो आखिर अंगीभूत व संबद्ध कुल 15 कॉलेजों में इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण 50 हजार से अधिक छात्रों का नामांकन कैसे संभव हो पायेगा. फिलहाल, कम अंक लानेवाले छात्र ज्यादा-से-ज्यादा कॉलेजों में एडमिशन फॉर्म जमा करने के प्रयास में लगे हुए हैं.
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