कहीं कैंटीन है भी, तो रहता है बंद

Published at :08 Mar 2015 12:36 AM (IST)
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कहीं कैंटीन है भी, तो रहता है बंद

कुव्यवस्था : जेपीविवि व कॉलेजों में कैंटीन का नहीं मिल रहा लाभ विवि में भी नहीं है कैंटीन छपरा (नगर) : खाली समय में कॉलेज कैं टीन के समोसे व चाय की चुस्कियों के बीच दोस्तों के साथ पढ़ाई से लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा का अवसर जेपीविवि के छात्रों के लिए महज सपना ही […]

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कुव्यवस्था : जेपीविवि व कॉलेजों में कैंटीन का नहीं मिल रहा लाभ
विवि में भी नहीं है कैंटीन
छपरा (नगर) : खाली समय में कॉलेज कैं टीन के समोसे व चाय की चुस्कियों के बीच दोस्तों के साथ पढ़ाई से लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा का अवसर जेपीविवि के छात्रों के लिए महज सपना ही है. मालूम हो कि जेपीविवि अंतर्गत लगभग किसी भी कॉलेज में कैं टीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है. हालांकि नैक से एक्रिडिएशन लेने के दबाव में कुछ कॉलेजों में एक हिस्से में कैं टीनका निर्माण तो कराया गया है. मगर वह कभी चालू ही नहीं हो पाया है.
अलबत्ता दो क्लास के खाली अंतराल में छात्र बाहरी फुटपाथी दुकानों पर नजर आते हैं, तो कॉलेज शिक्षक व कर्मियों को भी चाय की तलब होने पर भी बाहरी दुकानों पर आश्रित होना पड़ता है.
फुटपाथी दुकानदारों की चांदी :उधर कॉलेज में कैं टीन सुविधा नहीं होने के कारण फुटपाथी दुकानदारों की हमेशा चांदी रहती है. विशेष रूप से दूर-दराज से कॉलेज आनेवाले छात्र-छात्रओं के लिए तो कॉलेज के समीप चलनेवाले फुटपाथी दुकान व ठेले-खोमचेवालों का ही आसरा रहता है. क्लास छूटने की चिंता में वे मजबूरन दूर न जाकर इन दुकानों पर मिलनेवाले स्वास्थ्य की दृष्टि से हानि पहुंचानेवाले खाद्य पदार्थो का सेवन करते हैं. शहर के राजेंद्र कॉलेज, जेपीएम कॉलेज, रामजयपाल कॉलेज, गंगा सिंह कॉलेज सहित अन्य कॉलेजों के समीप हर दिन फुटपाथी दुकानों के साथ ही ठेले व खोमचेवालों की भरमार रहती है.
सबसे अधिक परेशान हैं पीजी के छात्र : जेपीविवि के कॉलेजों की कौन कहे, खुद विवि परिसर में अधिकृत रूप से कैं टीननहीं रहने के कारण वहां चलनेवाले पीजी विभागों को छात्रों के साथ ही विवि के कर्मी व शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है. एक तो मुख्य सड़क से विवि की दूरी करीब एक से दो किलोमीटर है. ऐसे में छात्र एक बार विवि आ गये, तो फिर पूरा क्लास खत्म होने के बाद ही वे पुन: घर लौटने की हिम्मत जुटा पाते हैं. ऐसी ही स्थिति सीवान व गोपालगंज के विभिन्न कॉलेजों में विवि में पहुंचनेवाले शिक्षक, कर्मियों व छात्रों को भी उठाना पड़ता है.
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