निकली शिव बरात की झांकी

Published at :17 Feb 2015 8:30 AM (IST)
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निकली शिव बरात की झांकी

विद्यापतिनगर : अनुष्ठान व धार्मिक मान्यतायों से आस्था का केंद्र बना देव भूमि विद्यापतिधाम महाशिवरात्रि पर भक्तिमय बना हुआ है़ इस अवसर पर रात्रि में शिव के संग माता पार्वती के ब्याह की परंपरागत झांकी की तैयारी पूरी कर ली गयी है. पूर्व संध्या सोमवार को शिव बरात की झांकी निकाली गयी. दलसिंहसराय के एसडीओ […]

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विद्यापतिनगर : अनुष्ठान व धार्मिक मान्यतायों से आस्था का केंद्र बना देव भूमि विद्यापतिधाम महाशिवरात्रि पर भक्तिमय बना हुआ है़ इस अवसर पर रात्रि में शिव के संग माता पार्वती के ब्याह की परंपरागत झांकी की तैयारी पूरी कर ली गयी है. पूर्व संध्या सोमवार को शिव बरात की झांकी निकाली गयी.
दलसिंहसराय के एसडीओ वरुण कुमार मिश्र, डीएसपी पंकज कुमार व विद्यापति परिषद के अध्यक्ष गणोश गिरि कवि ने स्थानीय गणमान्य के साथ धार्मिक ध्वज दिखा विद्यापतिधाम से रवाना किया़
शिव बरात की झांकी प्रखंड के दर्जनों गांवों का भ्रमण करते हुए अनुमंडल क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी इलाकों में शिव पार्वती विवाह के पौराणिक दृश्य को भक्तों के हृदय में तरोताजा करने का प्रयास कर धार्मिक भावनाओं को बल देगी़ झांकी में दूल्हा बने महादेव शिव के साथ देवता, नर, दानव, भूत, पिचास सहित प्राणी जगत के अन्य जीव शामिल किये गये हैं. इससे शिवपुराण में वर्णित शिव बरात के दृश्य दृष्टिगोचर हो रहे हैं
शिव बरात की झांकी मंगलवार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि को पुन: विद्यापतिधाम मंदिर पहुंचेगी़ जहां मंदिर प्रांगण में बने ब्याह मंडप में शिव माता पार्वती विवाह का नाट्य मंचन प्रस्तुत किया जायेगा़ धार्मिक परंपरा, रीति रिवाज, एवं वेद पुराण में वर्णित इस विवाह के नाट्य स्वरूप को देखने की हर वर्ष श्रद्धालुओं में असीम जिज्ञासा होती है़
फलस्वरुप हजारों की भीड़ मंदिर परिसर में जमा हो जाता है़ इसे लेकर प्रशासनिक व्यवस्था भी होती है़ पर्याप्त पुलिस बल व अधिकारी के कारण इस धार्मिक परंपरा का प्रकटीकरण भक्तिभाव के साथ शांतिपूर्ण संपन्न हो जाता है़ इसमें विद्यापतिधाम मंदिर समिति के सदस्यों की भूमिका सराहनीय अब तक रही है़ महाशिवरात्रि पर होने वाले अनुष्ठान को लेकर तैयारी एक माह पूर्व से कीजाती है़
वर्षो से चल रही परंपरा
भक्तशिरोमणि महाकवि विद्यापति की समाधि भूमि पर बना महादेव मंदिर आस्था का केंद्र रहा है़ मान्यता है कि कवि कि भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने अपने भक्त कवि के साथ रहने का निर्णय लिए थ़े उगना रुपी नौकर के बाद महादेव शिव विद्यापति के समादिष्ट होने पर पुन: साथ हो लिये थ़े जिसे बाद में धार्मिक प्रमाण दिया गया़
यहां विशाल विद्यापति मंदिर ऐसे अनेकों अपने कि ंवन्तियों को सहेजे हुए है़ं जो बार बार स्मरणीय होता है़ यहां भक्तिभाव को देख वर्ष 1925 में मंदिर व धार्मिक स्थल के देख रेख के लिए विद्यापति परिषद का गठन किया गया़ तब से महाशिवरात्रि का अनुष्ठान परंपरा में रचा बसा है.
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