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60 हजार के बदले 490.4 एमटी की हुई खरीद

Updated at : 25 Dec 2019 1:09 AM (IST)
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60 हजार के बदले 490.4 एमटी की हुई खरीद

छपरा (सदर) : धान खरीद 2019-20 सीजन में सरकार के निर्देश व डीएम के कड़े रुख के बाद धान अधिप्राप्ति में तो, गति आयी, परंतु, अभी भी कम से कम तीन प्रखंड ऐसे है. जहां 24 दिसंबर तक एक छटांक भी धान की खरीद नहीं हुई है. ऐसी स्थिति में इन प्रखंडों के किसान सरकार […]

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छपरा (सदर) : धान खरीद 2019-20 सीजन में सरकार के निर्देश व डीएम के कड़े रुख के बाद धान अधिप्राप्ति में तो, गति आयी, परंतु, अभी भी कम से कम तीन प्रखंड ऐसे है. जहां 24 दिसंबर तक एक छटांक भी धान की खरीद नहीं हुई है.

ऐसी स्थिति में इन प्रखंडों के किसान सरकार के द्वारा मिलने वाली अपने उपज को बेचने की सुविधा का लाभ पाने से वंचित हो रहे है. अभी भी किसानों के 25 से 30 फीसदी धान के फसल या तो, खेत में है या खलिहान में है. वहीं जो धान की फसल घर पहुंची है. उसमें भी नमी धान खरीद में समस्या बनी हुई है.
53 किसानों से 4904 क्विंटल धान की खरीद : सरकार की ओर से 15 नवंबर से 2019 से धान अधिप्राप्ति का निर्देश दिया गया है. वहीं साधारण धान के लिए 1815 तो, ग्रेड वन धान के लिए 1835 रुपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित किया है. परंतु, धान खरीदने की दिशा में डीएम के कड़े रुख के बाद अधिकतर प्रखंडों में धान खरीद में तेजी आयी है. परंतु, अभी भी छपरा सदर, दिघवारा व नगरा प्रखंड में एक छटांक धान की खरीदारी नहीं हो पायी है.
पूर्व में पैक्स चुनाव में व्यस्तता के साथ धान अधिप्राप्ति में लापरवाह 22 प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों की ओर से 17 दिसंबर तक धान अधिप्राप्त शुन्य होने से नाराज डीएम सुब्रत कुमार सेन ने 22 प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को लापरवाह मानते हुए जवाब तलब किया. इसके बाद विगत एक सप्ताह में 17 प्रखंडों में 53 किसानों से 4904 की धान की अधिप्राप्ति 24 दिसंबर तक किये जाने का दावा डीसीओ करतें है.
उनका कहना है कि 196 पैक्स व छह व्यापार मंडल समेत 202 क्रय एजेंसियों द्वारा धान अधिप्राप्ति किये जाने का कार्य किया जा रहा है. वहीं इस मद में अग्रिम के रूप में प्राप्त साढ़े 15 करोड़ रुपये इन सभी क्रय एजेंसियों को लक्ष्य के 20 फीसदी राशि स्टेट कॉपरेटिव बैंक के माध्यम से उनके खाते में भेजी जा चुकी है. परंतु, छपरा सदर, दिघवारा, नगरा के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी अभी भी उदासीन है.
क्या कहते हैं किसान
पैक्स चुनाव के कारण अध्यक्षों की व्यस्तता व धान की 15 से 20 फीसदी खेत खलिहान में ही नहीं होने की वजह से किसान अभी अपने धान की फसल को घर में लाने का काम कर रहें है. यदि अब खरीद करने वाले एजेंसियां लापरवाही बरतेंगी तो निश्चित तौर पर अधिप्राप्ति प्रभावित होगी.
उदय कुमार सिंह,मशरक
धान की फसल जो किसानों के खेतों में आ गयी है, उनमें भी नमी का बहाना बनाकर क्रय एजेंसियों द्वारा धान खरीद की दिशा में लापरवाही बरती जा रही है. इससे निश्चित तौर पर अधिप्राप्ति के लक्ष्य को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरकार हासिल नहीं कर सकती.
अरुण कुमार सिंह,बनियापुर
अभी धान की फसल पूरी तरह किसानों के खेतों से घरों में पहुंची भी नहीं है तभी कुछ बिचौलिये किसानों का ठगी करने के लिए सक्रिय हो गये है. ऐसी स्थिति में प्रशासन को बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है. अन्यथा एक बार फिर बिचौलियों की गतिविधियों का शिकार किसान हो जायेंगे.
संजय कुमार सिंह,गड़खा
क्या कहते हैं पदाधिकारी
नवंबर व दिसंबर में पांच चरणों में आयोजित होने वाले पैक्स चुनाव में व्यस्तता व धान की फसल के खलिहान में फंसे होने की वजह से खरीद की रफ्तार दिसंबर के मध्य तक नहीं पकड़ पायी थी. अब धान खरीद की रफ्तार तेजी हुई है. हर हाल में सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 60 हजार एमटी को प्राप्त करने की कोशिश की जायेगी. नेसार अहमद, डीसीओ, सारण
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