बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी

Updated at : 08 May 2019 12:34 AM (IST)
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बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी

छपरा : गर्मी के महीनों की शुरुआत होते ही कई प्रकार के रोगों में बढ़ोतरी हो जाती है. इन महीनों में मियादी बुखार यानी टाइफायड के मरीजों की भी संख्या में इजाफा हो जाता है. अन्य बुखारों की अपेक्षा मियादी बुखार अधिक गंभीर रोग की श्रेणी में आता है. सही समय पर बेहतर प्रबंधन के […]

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छपरा : गर्मी के महीनों की शुरुआत होते ही कई प्रकार के रोगों में बढ़ोतरी हो जाती है. इन महीनों में मियादी बुखार यानी टाइफायड के मरीजों की भी संख्या में इजाफा हो जाता है. अन्य बुखारों की अपेक्षा मियादी बुखार अधिक गंभीर रोग की श्रेणी में आता है. सही समय पर बेहतर प्रबंधन के अभाव में इससे जान जाने का भी खतरा बढ़ जाता है.

क्या है मियादी बुखार : मियादी बुखार यानी टाइफायड सालमोनेला टायफी नामक बैक्टीरिया से फैलता है. यह बैक्टीरिया समान्यता दूषित पानी एवं संक्रमित खाद्य पदार्थों में ही पनपते हैं. साथ ही यह बैक्टीरिया पानी में लंबे समय तक जीवित रहने में समर्थ भी होता है. इस कारण दूषित पानी या संक्रमित भोजन सेवन करने से व्यक्ति मियादी बुखार से ग्रसित हो जाता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व भर में प्रतिवर्ष 1 से 2 करोड़ लोग मियादी बुखार के शिकार होते हैं, जिनमें लगभग 13 लाख से 16 लाख लोगों को सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण जान गंवानी पड़ती है. जिला एसीएमओ डॉ सरोज सिंह ने बताया कि मियादी बुखार के लिए दूषित पानी एवं संक्रमित आहार सेवन मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है. साफ पानी एवं ताजा भोजन सेवन कर से इस रोग से बचा जा सकता है.
मियादी बुखार को लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है. दस्त नियमित बढ़ने वाला तेज बुखार के साथ दस्त एवं उलटी, बदन दर्द, कमजोरी, सिरदर्द, पेट दर्द, भूख नहीं लगना, बच्चों में दस्त की शिकायत एवं बुखार के साथ बड़ों में कब्ज की शिकायत मियादी बुखार के लक्षण होते हैं. ऐसे लक्ष्ण दिखाई देने पर मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए.
इलाज के तौर पर ऐसे मरीजों को एंटीबायोटिक का डोज दिया जाता है, जिसे मरीज को लगभग 2 हफ्तों तक दवा खानी होती है. मरीज घर पर ही रहकर संतुलित एवं सुपाच्य भोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में नारियल का पान एवं फलों के जूस के सेवन के साथ दवा का सेवन कर सकता है.
बचाव के लिए यह करें
दूषित पानी एवं संक्रमित या बासी भोजन खाने से बचें
बाहर का खाना खाने से बचें
ठेले पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों एवं पेय पदार्थों का सेवन नहीं करें
फल या सब्जी को हमेशा साफ़ पानी से धोएं
बाहर मिलने वाले बर्फ का इस्तेमाल नहीं करें
खाना खाने से पहले साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं
नियमित बुखार के साथ उलटी या दस्त होने पर डॉक्टर से जरूर मिलें
बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा नहीं खाएं
इनका विशेष रखें ध्यान
जीवाणुओं की वृद्धि तेज हो जाती है यदि बने भोजन को घंटे से अधिक रूम के तापमान में रखा जाता है. खाद्य पदार्थों को 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे या 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रखने पर जीवणुओं के संक्रमण से खाद्य पदार्थों को सुरक्षित किया जा सकता है.
कच्चे फल, मीट, मछली या अन्य कच्चे खाद्य पदार्थों को खाने से दूर रखना चाहिए क्योंकि इनमें जीवाणुओं की संख्या अधिक होती है. खाने के साथ रखने से जीवाणुओं के खाने में संक्रमण फैलने की पूरी संभावना होती है. सभी कच्चे फल, सब्जी, मीट या मछली को अच्छी तरह साफ पानी में धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए.
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