पिंजरापोल गोशाला की बदलेगी तस्वीर, पशुओं के रखरखाव के लिए बनेंगे शेड
Updated at : 11 Dec 2017 8:46 AM (IST)
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20 लाख रुपये उपलब्ध कराये गोशाला के विकास मद में छपरा (सदर) : शहर से सटे 110 वर्ष पुराने श्री सारण पिंजरापोल गोशाला की तस्वीर अब बदलने वाली है. सरकारी उदासीनता व सामाजिक परिवेश में आये बदलाव की वजह से बदहाल इस गोशाला के सर्वांगीण विकास तथा दुधारू एवं अन्य वृद्ध, अपाहिज व असहाय गोवंश […]
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20 लाख रुपये उपलब्ध कराये गोशाला के विकास मद में
छपरा (सदर) : शहर से सटे 110 वर्ष पुराने श्री सारण पिंजरापोल गोशाला की तस्वीर अब बदलने वाली है. सरकारी उदासीनता व सामाजिक परिवेश में आये बदलाव की वजह से बदहाल इस गोशाला के सर्वांगीण विकास तथा दुधारू एवं अन्य वृद्ध, अपाहिज व असहाय गोवंश की रक्षा के उद्देश्य से स्थापित इस गोशाला में देहाती नस्ल की दुधारू गायों की खरीद,
जैविक खाद बायोगैस आदि के उत्पादन के अलावा मवेशियों के चारे के रखरखाव के लिए गोदाम शेड, जलापूर्ति आदि व्यवस्था अगले माह शुरू हो जायेगी. इसके लिए सरकार के निर्देश के आलोक में गोशाला कमेटी के पदेन अध्यक्ष सह एसडीओ तथा सचिव के द्वारा जीर्णोद्धार तथा गायों की संख्या दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्य किये जाने की बात बतायी जा रही है.
श्री सारण पिंजरापोल गोशाला की बदहाली को दूर करने तथा नयी गायों के खरीद व अन्य सुविधाओं को बहाल करने के लिए पशुपालन विभाग ने 20 लाख रुपये उपलब्ध कराया है. इसके तहत पांच लाख रुपये के देशी नस्ल के दुधारू गायों की खरीदगी के लिए जैविक खाद व बायोगैस का प्लांट कृषि विभाग के सहयोग से कराने के लिए तथा शहर के निकट करिंगा स्थित इस गोशाला के बुनियादी ढांचे के विकास पर यह राशि खर्च होगी. समिति के सचिव रामप्रसाद शर्मा बताते हैं कि सोनपुर मेले में देशी नस्ल की गायों के खरीदने के अलावा देहाती क्षेत्र से भी देशी नस्ल के दुधारू गायों को खरीदा जायेगा. वहीं बदहाल गोशाला के विकास के मद में आवश्यक कार्य किये जायेंगे.
1908 में स्थापित हुई थी गोशाला
छपरा शहर में वर्ष 1908 में शहर के रतनपुरा मुहल्ले में स्व हरि प्रसाद के प्रयासों से गोशाला की स्थापना हुई थी. इसका उद्देश्य वृद्ध, अपाहिज तथा असहाय गोवंश की रक्षा करना है. जिले का यह एक मात्र पंजीकृत गोशाला है. बाद में मारवाड़ी समाज के अन्य गोशाला संचालकों के आग्रह पर गोवंश की बढ़ती संख्या के मद्देनजर मांझा स्टेट में शहर से चार किलोमीटर दूर करिंगा में 18 बिगहा जमीन दान दे दी. जहां सैकड़ों की संख्या में गोवंश के रहने के लिए शेड, नाद, कुंआ, चिकित्सालय, चारे की व्यवस्था रहती थी. यहीं नहीं बाद में स्व. बहुरिया फुलपति कुंवर ने भी छह बिगहा जमीन दिलिया रहिमपुर में तथा पांच बीघा जमीन गड़खा के साधपुर में बजाप्ता रजिस्ट्री कर दान कर दी. परंतु, अफसोस इस बात का है कि इस पंजीकृत गोशाला की जमीन पर कुछ स्थानों पर लोगों ने अवैध कब्जा जमा लिया है.
इसे लेकर मुकदमा सिविल कोर्ट में अभी भी चल रहा है. अब बदली परिस्थितियों में वृद्ध, अपाहिज एवं दुधारू गायों एवं सांढ़ की संख्या लगभग ढाई दर्जन हैं. अब लोग वृद्ध एवं अपाहिज गायों को गोशाला में देने के बदले आर्थिक लाभ के लिए गोवंश को बेच देती है. इससे गोशाला में मवेशियों की संख्या कम हुई है.
इस गोशाला में हर वर्ष गोपास्टमी मेला समिति के द्वारा कार्तिक महीने में अष्टमी तिथि को आयोजित की जाती है. वहीं राज्य एवं राज्य से बाहर पहलवानों के बीच दंगल का भी आयोजन किया जाता है.
क्या कहते हैं सदर एसडीओ
श्री सारण पिंजरापोल गोशाला के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार से मिली सहायता मद की राशि 20 लाख रुपये से गोशाला में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के अलावा पांच लाख रुपये की लागत से दुधारू गाय खरीदने के साथ-साथ जैविक खाद व बायोगैस प्लांट भी गोशाला परिसर में लगाया जायेगा. जिससे गोशाला की आय भी बढ़े तथा गोवंश को सुविधा भी हो.
चेतनारायण राय, सदर एसडीओ सह अध्यक्ष, श्री सारण पिंजरापोल गौशाला, सारण
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