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इतिहास का काम घटना को प्रस्तुत करना

Updated at : 04 May 2024 11:39 PM (IST)
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इतिहास का काम घटना को प्रस्तुत करना

स्थानीय आरबी कॉलेज में जारी राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन की शुरुआत भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के स्नातकोत्तर इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. चन्दप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में हुई.

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दलसिंहसराय : स्थानीय आरबी कॉलेज में जारी राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन की शुरुआत भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के स्नातकोत्तर इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. चन्दप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में हुई. प्रधानाचार्य सह कार्यक्रम संयोजक प्रो. संजय झा के नेतृत्व में प्रो.झा ने अतिथियों का सम्मान पाग, चादर, गुलदस्ता एवं प्रतीक चिन्ह से किया. प्रो. प्रकाश ने कहा कि इतिहास का काम घटना को प्रस्तुत करना है न कि उसका विश्लेषण करना. भारतीय इतिहास को तथाकथित इतिहासकारों ने जिस रूप में वर्णित किया है वह तथ्यपूर्ण न होकर भ्रामक तथ्य को प्रस्तुत करता है. स्व चेतना के बल पर संपूर्ण इतिहास का बारीकी के साथ अध्ययन कर पुनः नवीन तरीके से इतिहास लेखन की आवश्यकता है. भ्रामक मानसिकता से लिखा गया इतिहास हमें भ्रम में डालकर स्व से दूर रखता है. हमें इससे मुक्त होना होगा. मुख्य वक्ता प्रो. जितेन्द्र नारायण ने अपने प्रखर वक्तव्य में कहा कि हमारी आपसी फूट ही हमारी गुलामी का मूल कारण रही है. स्व की कमी ही हमारी समस्त समस्याओं की जड़ है. आज भी हमारा स्व पूर्णतः विकसित नहीं हो पाया है. हमारी विरासत समृद्ध व श्रेष्ठ रही है. स्व चेतना के साथ हमें अपनी विरासत की सच्ची परख करते हुए उसे पुनः नवीन तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत है. अध्यक्षीय संबोधन में प्रो सिंह ने कहा कि हमें हमारी संस्कृति को मिटाने की खूब कोशिश हुई. आज भी हम पूरी बुलंदी से खड़े हैं. हमें अपनी ऐतिहासिक विरासत को सही रूप में समझते हुए पुन: इतिहास लेखन की आवश्यकता है. इसी क्रम में पैंतालीस शोधकर्ताओं एवं अध्यापकों ने आनलाइन एवं आफलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत किये. सेमिनार के समापन सत्र के वक्ता निर्मल कुमार पाण्डेय ने कहा कि हमारा इतिहास कई खामियों का शिकार रहा है. जरुरत है कि हम नये स्रोत को ग्रहण करते हुए स्व चेतना के साथ पूर्णतः मौलिक ढंग से इतिहास लेखन करें. मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय ने शास्त्रीय दृष्टि से भारतीय इतिहास की भारतीय दृष्टि से व्याख्या की. डॉ. भोला झा ने भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता पर बल दिया. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया.

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