Samastipur News:किसान लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा नीचले खेतों में 25 मई तक गिरायें

Published by : PREM KUMAR Updated At : 14 May 2025 10:47 PM

विज्ञापन

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के द्वारा किसानों को लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा गिराने की सलाह दी गयी है.

विज्ञापन

Samastipur News:समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के द्वारा किसानों को लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा गिराने की सलाह दी गयी है. कहा गया है कि निचली जमीन जहां जल जमाव ज्यादा होता हो उस खेत में लंबी अवधि वाले धान की किस्में राजश्री, राजेन्द्र मंसुरी, राजेन्द्र स्वेता, किशोरी,स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 वीपीटी-5204 तथा सत्यम की नर्सरी 25 मई से लगा सकते हैं. नर्सरी के लिये किसान खेत की तैयारी करें. स्वस्थ पौध के लिये नर्सरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करें. नर्सरी में क्यारी की चौराई 1.25 से 1.5 मीटर तथा लम्बाई सुविधानुसार रखें. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में राेपाई के लिये 800 से 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की नर्सरी तैयार करें. बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्त्रोत से करें. खरीफ मक्का की बोआई के लिए खेत की तैयारी करें. खेत की जुताई में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित मक्का की किस्में सुआन, देवकी, शक्तिमान-1, शक्तिमान-2, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 है. खरीफ मक्का की बोआई 25 मई से करें. किसान अदरक की बोआई शुरू करें. अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिये अनुशंसित है. खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 30 से 40 किलोग्राम, स्फूर 50 किलोग्राम, पोटास 80 से 100 किलोग्राम जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम एवं बोरेक्स 10 से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. अदरक के लिए बीज दर 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. बीज प्रकन्द का आकार 20 से 30 ग्राम जिसमें 3 से 4 स्वस्थ कलियां हो. रोपाई की दूरी 30 गुणा 20 सेमी रखें. अच्छी उपज के लिये रीडोमिल दवा के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित बीज की बोआई करें. भिंडी की फसल में फल एवं प्रराेह बेधक कीट की निगरानी करें. इसके पिल्लू भिंडी फलों के अन्दर छेद बनाकर उसके अन्दर घुसकर फलों को खाते हैं तथा इसे पूरी तरह नष्ट कर देते हैं. इसकी रोकथाम के लिए सर्वप्रथम प्रभावित फलों को तोड़कर मिट्टी के अन्दर दबा दें. अधिक नुकसान होने पर डाईमेथोएट 30 ईसी दवा का 1.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव आसमान साफ रहने पर ही करें. भिंडी की खड़ी फसल पर जैसीड एवं बोरर का प्रकोप होने पर नीम आधारित दवायें नीमीगोल्ड, नीमीसाईड का प्रयोग 2 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ रहने पर ही करें. उड़द और मूंग की फसल में पीला मोजैक वायरस से ग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दें. यह राेग सफेद मक्खी द्वारा फैलता है. इसके शुरुआती लक्षण पत्तियों पर पीले धब्बे के रूप दिखाई देता है, बाद में पत्तियां तथा फलियां पूर्णरूप से पीली हो जाती है. इन पत्तियों पर उत्तक क्षय भी देखा जाता है. फलन काफी प्रभावित होता है. लत्तर वाली सब्जियों नेनुआ, करैला, लौकी (कद्दू), और खीरा फसलों में फल मक्खी कीट की निगरानी करें. इन फसलों को क्षति पहुंचाने वाला यह प्रमुुख कीट है. यह घरेलू मक्खी की तरह दिखाई देने वाली भूरे रंग का होता है. मादा कीट मुलायम फलों की त्वचा के अन्दर अंडे देती है. अंंडे से पिल्लू निकलकर अन्दर ही अन्दर फलों के भीतरी भाग को खाता है. जिसके कारण पूरा फल सड़ कर नष्ट हो जाता है. इस कीट का प्रकोप शुरू होते ही 01 किलोग्राम छोआ 2 लीटर मैलाथियान 50 ईसी को 1000 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अन्तराल पर दो बार छिड़काव आसमान साफ रहने पर ही करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
PREM KUMAR

लेखक के बारे में

By PREM KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन