Samastipur News: रासायनिक खादों के खिलाफ वैज्ञानिकों का महा-अभियान, कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने 'खेत बचाओ अभियान' को दिखाई हरी झंडी

Published by : Purushottam Kumar Updated At : 01 Jun 2026 1:25 PM

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कुलपति ने हरी झंडी दिखाकर वैज्ञानिकों के दल को किया रवाना

Samastipur News: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पाण्डेय ने 'खेत बचाओ अभियान' को हरी झंडी दिखाई. 1 जून से 30 जून तक 8 केवीके के गांवों में वैज्ञानिक करेंगे किसान गोष्ठी. जानिए खबर विस्तार से…

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Samastipur News: समस्तीपुर जिला अंतर्गत पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) परिसर में आज से एक बड़े और दूरगामी कृषि सुधार अभियान का शंखनाद हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मिट्टी की सेहत सुधारने और पारंपरिक कृषि को नया जीवन देने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान’ की आधिकारिक शुरुआत की गई है. इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पाण्डेय ने कृषि वैज्ञानिकों के एक विशेष दल को हरी झंडी दिखाकर विवि परिसर से मैदानी क्षेत्रों के लिए रवाना किया. इस मुहिम से चंपारण और मिथिलांचल के किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगी है.

रासायनिक खादों के खिलाफ वैज्ञानिकों का महा-अभियान

इस गौरवमयी अवसर पर उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. पाण्डेय ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की. उन्होंने बताया कि आगामी 1 जून से 30 जून तक चलने वाले इस महीने भर के महा-अभियान के तहत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की आठ अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में आने वाले आठ विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) द्वारा चयनित गांवों का सघन दौरा करेंगी और वहां ग्रासरूट लेवल पर विशेष किसान गोष्ठियों व जागरूकता शिविरों का आयोजन करेंगी.

प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी मिट्टी की सेहत

कुलपति ने वैज्ञानिकों को निर्देशित करते हुए कहा कि इन गोष्ठियों का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले दीर्घकालिक नुकसान के प्रति सचेत करना है. इसके विकल्प के रूप में वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को बिना रासायनिक उर्वरकों के, जैविक और प्राकृतिक खेती के माध्यम से फसलों का बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन लेने की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकों से विस्तारपूर्वक अवगत कराया जाएगा. यह व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम पूरे जून महीने में प्रत्येक सप्ताह के पांच कार्य दिवसों (वर्किंग डेज) को निरंतर संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इस मुहिम से जोड़कर उनकी मिट्टी और फसल दोनों को सुरक्षित बनाया जा सके.

समस्तीपुर के पूसा से सुभाष चंद्र कुमार की रिपोर्ट

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