मोरवा में जनगणना से खुली ODF की पोल, 30-40% घरों में शौचालय नहीं, कर्मियों और अधिकारियों में हड़कंप

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AI जेनरेटेड फोटो

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Samastipur News: मोरवा प्रखंड में जनगणना शुरू होते ही ओडीएफ दावों की कलई खुल गई है. 30 से 40 फीसदी घरों में शौचालय न होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा शत-प्रतिशत शौचालय दिखाने के दबाव से प्रगणक और सुपरवाइजर परेशान हैं.

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Samastipur News: मोरवा प्रखंड में जनगणना का काम शुरू होते ही ओडीएफ (Open Defecation Free) के दावों की जमीनी हकीकत सामने आने लगी है. सर्वे के शुरुआती रुझानों ने ही प्रशासनिक महकमे और मैदानी कर्मियों के बीच हड़कंप मचा दिया है. कागजों पर शत-प्रतिशत ओडीएफ घोषित हो चुके इस प्रखंड के धरातल पर आज भी भारी कमियां देखने को मिल रही हैं.

इस जमीनी सच्चाई को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने को लेकर प्रगणक और सुपरवाइजर इस समय भारी असमंजस और दबाव की स्थिति में हैं.

कागजी दावे बनाम जमीनी हकीकत

जनगणना के लिए शुरू हुए ग्राउंड सर्वे और सरकारी फाइलों के आंकड़ों में एक बड़ा अंतर उजागर हुआ है:

  • शौचालय विहीन परिवार: प्रखंड के करीब 30 से 40 फीसदी घरों में आज भी शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
  • प्रशासन का पुराना दावा: सरकारी रिकॉर्ड में प्रशासन द्वारा प्रखंड के सौ फीसदी घरों को पहले ही शौचालय युक्त दर्शाया जा चुका है.
  • संदेह के घेरे में ओडीएफ दर्जा: धरातल पर जांच शुरू होते ही अब यह पोल खुलने लगी है कि बिना वास्तविक निर्माण के ही पंचायतों और पूरे प्रखंड को ओडीएफ घोषित कैसे कर दिया गया.

प्रगणकों और सुपरवाइजरों पर ‘सौ फीसदी’ दिखाने का दबाव

जमीनी स्तर पर सर्वे कर रहे कर्मियों (प्रगणकों और सुपरवाइजरों) के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है:

  • अधिकारियों का मौखिक निर्देश: सूत्रों के अनुसार, वरीय अधिकारियों द्वारा कर्मियों पर ऐसा दबाव बनाया जा रहा है कि वे हर हाल में हर घर में शौचालय ही दिखाएं.
  • सच्चाई दिखाने पर कार्रवाई का डर: यदि कर्मी सर्वे में किसी परिवार को शौचालय विहीन दर्शाते हैं, तो उन्हें अधिकारियों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी.
  • झूठा डेटा देने पर जनता का नुकसान: यदि सर्वे में जबरन शौचालय दिखा दिया गया, तो भविष्य में इन जरूरतमंद परिवारों को कभी भी इस सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा.

कर्मियों की दुविधा: जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है, जबकि कागज की हकीकत कुछ और ही है. ऐसे में प्रगणक और सुपरवाइजर आपस में मंत्रणा कर रहे हैं कि इस समस्या से कैसे निपटा जाए.


शौचालय योजना और ग्रांट का पूरा गणित

प्रखंड को पूर्व में ओडीएफ घोषित किए जाने और उसके बाद हुए सरकारी भुगतानों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

मुख्य बिंदुयोजना और सर्वे की स्थिति
ओडीएफ घोषणा का वर्षसाल 2016 में पूरे प्रखंड को आधिकारिक रूप से ओडीएफ घोषित किया गया था.
प्रति परिवार सरकारी अनुदानओडीएफ घोषणा के बाद हजारों लोगों को ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई थी.
भुगतान की गड़बड़ीजमीनी स्तर पर कुछ शौचालय बने, जबकि कइयों का भुगतान सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गया.
खुलासे का समयओडीएफ होने के ठीक 10 साल बाद (2026 में) जनगणना की इस प्रक्रिया से पूरे मामले का पर्दाफाश हो रहा है.
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Aaruni Thakur

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By Aaruni Thakur

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