Samastipur News:नदियां सिर्फ जलधारा नहीं बल्कि संस्कृति, जीवन व प्रकृति की धड़कन : विधायक
Published by : KRISHAN MOHAN PATHAK Updated At : 28 Sep 2025 6:23 PM
नदियां मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह सिर्फ जलधारा नहीं बल्कि संस्कृति, जीवन और प्रकृति की धड़कन हैं.
Samastipur News:मोहिउद्दीननगर : नदियां मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह सिर्फ जलधारा नहीं बल्कि संस्कृति, जीवन और प्रकृति की धड़कन हैं. यदि हम अपने भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो नदियों का संरक्षण अनिवार्य है. बढ़ते प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण कई नदियां संकट के दौर से गुजर रही है. यह बातें रविवार को सुल्तानपुर स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में विश्व नदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित नदी के धार्मिक, सामाजिक व आर्थिक विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन के दौरान विधायक राजेश कुमार सिंह ने कही. कार्यक्रम की अध्यक्षता अरुण कुमार सिंह ने की. संचालन नंद किशोर कापर ने किया. गंगा समग्र व शंकराचार्य सेवा समिति के सौजन्य से आयोजित संगोष्ठी का संयोजन भाई रणधीर ने किया. पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी नवल किशोर सिंह ने कहा कि अनादिकाल से नदियां हमारी संस्कृति, सभ्यता व संस्कार को पल्लवित, पुष्पित व पोषित करती आ रही हैं. वर्तमान परिवेश में हमें नदियों को स्वच्छ व सदानीरा बनाये रखने के साथ उनके संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है. गीतकार ईश्वर चंद्र झा करुण ने कहा कि नदियां न केवल जल का स्रोत है बल्कि हमारी संस्कृति, धार्मिक, आर्थिक व पारिस्थितिक तंत्र का अभिन्न अंग भी हैं. गंगा समग्र के प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश सिंह ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से केंद्र की एनडीए सरकार ने गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने का सराहनीय कदम उठाया है. प्रो. हरि नारायण सिंह हरि व प्रो. भारतेंदु सिंह ने कहा कि वर्तमान में नदियां सिकुड़ रही हैं. कई जलधारा विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है. मानव निर्मित बांधों, नहरें व जल परिवहन परियोजनाओं ने जल के प्रवाह को बदल दिया है. इससे पारिस्थितिक तंत्र और जलवायु संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. अश्विनी कुमार ने कहा कि यदि नदियों को आपस में नहीं जोड़ा गया तो आने वाले समय में सामाजिक संघर्ष, क्षेत्रीय विवाद व मानव अस्तित्व का संकट गहरा जायेगा. कथावाचक पंडित प्रशांत महाराज ने कहा कि यह आवश्यक है कि नदियों के संरक्षण, पुनर्भरण और सतत उपयोग के प्रति वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सामूहिक प्रयास किये जायें. इस दौरान गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की स्थानीय लोगों को शपथ दिलाई गई. मौके पर शंभू सिंह, वरुण सिंह, रवि शंकर सिंह, गोलू सिंह, रवि सिंह, कमल सिंह सहित ग्रामीण मौजूद थे.
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