कृषि से जुड़ी रणनीति बनाने की जरूरत : कुलकर्णी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Jun 2024 11:22 PM
डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित पंचतंत्र भवन में जलवायु परिवर्तन के परिदृश्य में पारंपरिक ज्ञान व आधुनिक दृष्टिकोण से भारतीय कृषि विषय पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शनिवार से शुरु हुई.
पूसा : डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा स्थित पंचतंत्र भवन में जलवायु परिवर्तन के परिदृश्य में पारंपरिक ज्ञान व आधुनिक दृष्टिकोण से भारतीय कृषि विषय पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शनिवार से शुरु हुई. अतिथियों ने दीप जलाकर इसका शुभारंभ किया. अखिल भारतीय किसान संघ व भारतीय एग्रो इकोनामिक रिसर्च सेंटर ने आयोजक के रूप में अपनी सहभागिता दी. मुख्य अतिथि भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश दत्तात्रेय कुलकर्णी ने कहा कि संस्थान के बीच हुए समझौता को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान एवं आधुनिक ज्ञान के साथ मिलाकर जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि से जुड़ी रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान किया जाना चाहिए. कुलपति डॉ पीएस पांडेय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज्यादा असर कृषि पर देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि की प्राचीन ज्ञान जलवायु परिवर्तन के इस दौर में पूरे विश्व को नई दिशा दे सकती है. विश्वविद्यालय में प्राकृतिक खेती पर एक विस्तृत कोर्स शुरू किया गया है. वैदिक एवं अन्य प्राचीन कृषि पर भी अनुसंधान करने की आवश्यकता है. भारतीय कृषि आर्थिक अनुसंधान परिषद के द्वारा इस ओर अच्छा कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पारंपरिक खेती के ज्ञान को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ नये रूप में डिजिटल कृषि के विभिन्न माध्यमों से किसानों तक पहुंचायेगा. विश्वविद्यालय में पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक दृष्टिकोण को जोड़ कर अनुसंधान करने पर भी विशेष महत्व दिया जायेगा. विशिष्ट अतिथि डॉ मकरंद करकरे ने पारंपरिक कृषि की विशेषताओं के विषय में जानकारी दी. मौजूद प्रमोद कुमार चौधरी ने भारतीय किसान संघ के इतिहास को बताते हुए वर्तमान संदर्भ में उसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी. इस दौरान स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय एवं भारतीय एग्रो इकानोमिक रिसर्च सेंटर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये. संचालन डॉ राजीव श्रीवास्तव ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ शंकर झा ने किया. कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव डॉ मृत्युंजय कुमार, निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह, अधिष्ठाता डॉ अम्बरीष कुमार, अधिष्ठाता डॉ उषा सिंह, अधिष्ठाता डॉ अमरेश चंद्रा, डॉ राम कुमार साहू, सूचना पदाधिकारी डॉ कुमार राज्यवर्धन थे.
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