Samastipur News: 18 हजार आवास स्वीकृत, फिर भी झोपड़ी में रहने को मजबूर गरीब
Published by : SUMIT KUMAR Updated At : 01 Jun 2026 3:31 PM
18 हजार आवास स्वीकृत, आवास के लिए मुंह ताकते गरीब, बाजी मार रहे सामर्थ्यवान
Samastipur News: मोरवा प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना में रसूखदारों की चांदी है. 5 साल में 18 हजार मकान स्वीकृत होने के बाद भी गरीब झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं. नए सर्वे से भी पात्रों के नाम गायब हैं. जानिए पूरी खबर…
Samastipur News: समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड क्षेत्र में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है. योजना का नाम इंदिरा आवास से बदलकर भले ही प्रधानमंत्री आवास योजना हो गया हो, लेकिन स्थानीय गरीबों की किस्मत नहीं बदली. प्रखंड के महादलित टोलों में आज भी गरीबों की झोपड़ियां अपनी बदहाली और अधिकारियों की नजरअंदाजी की कहानी बयां कर रही हैं. आरोप है कि सामर्थ्यवान और रसूखदार लोग अपनी पहुंच और पैसे के बल पर इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, जबकि वास्तविक हकदार सिर्फ मुंह ताकते रह गए हैं.
5 साल में बने 18 हजार मकान, पैसों के खेल में गरीबों की हकमरी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में मोरवा प्रखंड क्षेत्र में 18,000 से अधिक मकानों की स्वीकृति मिली है. हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश मकान उन लोगों को आवंटित कर दिए गए, जिनके पास पहले से ही पक्के और रहने लायक मकान मौजूद थे. आरोप है कि आवास सहायकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से पैसों का जमकर खेल हुआ है. इस बंदरबांट के कारण गरीबों की हकमरी हुई है और उनके पक्के मकान के अरमानों पर पानी फिर गया है.
नए सर्वे की सूची से भी असली हकदार गायब, जांच की मांग
विगत एक साल से आवास योजना को लेकर लगातार नए सर्वे किए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि नवंबर तक लाभार्थियों को प्रथम किस्त का भुगतान भी कर दिया जाएगा. लेकिन इस बार की सूची के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. नए सर्वे में भी वास्तविक हकदारों के नाम गायब हैं और रसूखदारों के नाम शामिल कर लिए गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में जिन लोगों को राशि मिली, उन्होंने मकान बनाया ही नहीं क्योंकि पैसों की इतनी बंदरबांट हुई कि निर्माण के लिए कुछ बचा ही नहीं. ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
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By SUMIT KUMAR
सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।
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