Samastipur News:किंग ओएस्टर व इनोकी मशरूम बढ़ाता है रोग प्रतिरोधी क्षमता : डॉ दयाराम

Published by : KRISHAN MOHAN PATHAK Updated At : 12 Oct 2025 6:48 PM

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डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के फार्म में किंग ओएस्टर एवं इनोकी मशरूम के बेहतर उत्पादन को लेकर किसानों के बीच प्रत्यक्षण हुई.

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Samastipur News:पूसा : डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के फार्म में किंग ओएस्टर एवं इनोकी मशरूम के बेहतर उत्पादन को लेकर किसानों के बीच प्रत्यक्षण हुई. इस दौरान सेवानिवृत वैज्ञानिक सह मशरूम विशेषज्ञ डॉ दयाराम ने बताया कि शीत (विन्टर मशरूम) मशरूम या इनोकी मशरूम भी एक औषधीय मशरूम है जो लीवर, पेट एवं आंत के अल्सर से बचाव एवं नियंत्रण करता है. इसके अलावा प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है. ट्यूमर, कैंसर आदि घातक बीमारी से बचाव करता है. पौष्टिक दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसमें विटामिन बीडी प्रचूर मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इस मशरूम में पोटैशियम, फास्फोरस, सेलेनियम, आयरन जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. इनोकी मशरूम फ्लेवोनोइड्स, फिलानिक यौगिकों और पॉलीसेकेराइड सहित एंटीऑक्सिडेंट से भरे होते हैं. इसमें 2.7 प्रतिशत प्रोटिन, 5-8 प्रतिशत वसा, 8-9 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 2-3 प्रतिशत फाइबर, प्रचुर मात्रा में पोटैशियम, आयरन आदि पोष्टिक तत्व पाये जाते हैं. इसमें कैलोरी ऊर्जा पाया जाता है. किंग ओयस्टर मशरूम मशरूम के प्रयोग से पेट में हुकवर्म या अन्य कीड़े की समस्या समाप्त हो जाती है. इसके अलावा इस मशरूम में ट्यूमर, कीटाणु एवं जीवाणु नियंत्रण करने के गुण पाये जाते है. इसके अलावा यह एन्टी ऑक्सीडेन्ट गुण से भरपुर है जो ब्लड सुगर व ब्लड प्रेशर में फायदा करता है. प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. इरगोथायोमीन तत्व विभिन्न तरह का लाभ पहुंचाता है. इस मशरूम की खेती अन्य ओयस्टर की प्रजातियों की भांति की जाती है. सिर्फ अन्तर इतना है कि इसे एक निश्चित तापक्रम पर 15-22 डिग्री सेल्सियस पर उत्पादन किया जाता है. अक्टूबर से मार्च तक कुल 4 फसल लिया जा सकता है. इस मशरूम की खेती लकड़ी के बुरादों पर किया जाता है. परन्तु बिहार में इसकी खेती गेहूं के भूसा तथा मक्के के काव स्टोन (नेढ़ा) पर भी अच्छी उपज प्राप्त होता है. बिहार में इस मशरूम का उत्पादन 3.5 टन वार्षिक है. इसे बतौर सब्जी या अन्य व्यंजन के रूप में प्रयोग करना भी लाभकारी होता है. वहीं केंद्र प्रभारी सह मशरूम वैज्ञानिक डॉ आरपी प्रसाद ने बताया कि अधिक उत्पादन होने पर इसे सुखा कर वायुरहित पैक करके सालभर रखें. समय-समय पर इसका उपयोग पाउडर या जल में मिलाकर इस मशरूम की खेती नवम्बर से मार्च तक वटन मशरूम के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है.

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