असम विधानसभा से UCC पास, अमित शाह ने जनता को दी बधाई; बताया बीजेपी का संकल्प

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पीटीआई
Assam Passed UCC Bill: असम विधानसभा से यूसीसी पारित होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की जनता को बधाई दी है.
Assam Passed UCC Bill: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, असम की जनता को बधाई. समान नागरिक संहिता (UCC) भाजपा की स्थापना के दिन से ही उसका संकल्प रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भाजपा-शासित राज्य सरकारें हर नागरिक के लिए एक समान कानून लागू कर रही हैं. मुझे खुशी है कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद, आज असम ने भी समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया है.
असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित
असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सह-जीवनसाथी संबंध को नियंत्रित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है. हालांकि, विपक्ष ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की.
समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का तीसरा राज्य बना असम
प्रस्तावित विधेयक के पारित होने के साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है. गोवा में भी एक समान नागरिक कानून लागू है, जो उसके पूर्व पुर्तगाली औपनिवेशिक काल से चला आ रहा है.
विधानसभा अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया
‘समान नागरिक संहिता विधेयक, असम 2026’ पर दिनभर चली चर्चा के बाद अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से इसे पारित करने के लिए आगे बढ़ाने को कहा. दास ने विधेयक को व्यापक परामर्श के लिए प्रवर समिति को भेजने की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया, जिसके बाद विपक्षी सदस्य सदन में अध्यक्ष के आसन के निकट आ गए और नारेबाजी की. सत्ताधारी दल द्वारा लगातार लगाए जा रहे ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कराया. सत्ताधारी सदस्यों द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान करने के बाद उन्होंने कहा, मैं घोषणा करता हूं कि विधेयक पारित हो गया है. विधेयक पारित होते ही जोरदार तालियों से इसका स्वागत किया गया.
समान नागरिक संहिता में क्या है?
बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और सह जीवनसाथी संबंध का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. हालांकि, विधेयक में कहा गया है कि यह असम में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों के किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं होगा. इसमें कई दंडात्मक उपायों का प्रस्ताव है, जिनमें द्विविवाह या बहुविवाह के लिए सात साल की कैद और सह-जीवनसाथी संबंध का पंजीकरण न कराने पर तीन महीने की कैद शामिल हैं.
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