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RPCAU Pusa : केला के 60 सुधारित किस्मों के जीन बैंक को किया गया संरक्षित

Updated at : 27 Aug 2024 5:46 AM (IST)
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RPCAU Pusa :

RPCAU Pusa : banana farming

RPCAU Pusa :डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के तत्वावधान में केला अनुसंधान केंद्र गोरौल ने केला की खेती और किसान सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है.

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RPCAU Pusa : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के तत्वावधान में केला अनुसंधान केंद्र गोरौल ने केला की खेती और किसान सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है. बीआरसी, गोरौल ने 60 सुधारित केला किस्मों के जीन बैंक को सफलतापूर्वक संरक्षित किया है. जिससे भविष्य के अनुसंधान और विकास के लिए जेनेटिक विविधता की रक्षा हुई है.

RPCAU Pusa : जिलों के किसानों के बीच वैज्ञानिक केला खेती प्रथाओं को प्रशिक्षित और प्रदर्शित किया

इसके अलावा केंद्र ने 2022-23 में बिहार और अन्य राज्यों के किसानों को जी-9 किस्म के 3.5 लाख टिशू कल्चर प्लांट्स की आपूर्ति की है. इससे उच्च उपज और रोग प्रतिरोधी किस्मों को अपनाने को बढ़ावा मिला है. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय ने कहा कि केंद्र ने केला के पौधे, टिशू कल्चर प्लांट्स और अन्य सामग्रियों की बिक्री से 5 लाख 11 हजार 41 रुपये का राजस्व उत्पन्न किया है जो इसकी स्थिरता और स्व-निर्भरता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

बीआरसी गोरौल ने वैशाली, मधुबनी, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और शिवहर जिलों के किसानों के बीच वैज्ञानिक केला खेती प्रथाओं को प्रशिक्षित और प्रदर्शित किया है. जिससे उन्हें उत्पादकता और आय में सुधार करने के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान किया गया है.

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बीआरसी, गोरौल ने बिहार की केला किस्मों की अद्वितीय पहचान की रक्षा और प्रोत्साहन के लिए एक भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग के लिए आवेदन किया है. यह पहल बिहार के किसानों के बीच स्वामित्व की भावना को बढ़ावा देगी. जेनेटिक संसाधनों की रक्षा करेगी. निदेशक अनुसंधान डॉ एके सिंह ने कहा कि भूमि उपयोग को अनुकूलित करने के लिए बीआरसी गोरौल ने कोलोकेशिया, हाथी पैर यम और हल्दी के साथ केला की अंतरफसली खेती पर प्रयोग किया है.

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