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स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी, एक संदिग्ध धराया

Updated at : 16 Jul 2024 10:14 PM (IST)
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स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी, एक संदिग्ध धराया

स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर लाखों रुपये धोखाधडी का मामला उजागर हुआ.

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समस्तीपुर. स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर लाखों रुपये धोखाधडी का मामला उजागर हुआ. जालसाजी के शिकार पटना और जहानाबाद के करीब एक दर्जन लोगों ने मंगलवार सुबह समस्तीपुर नगर थाना क्षेत्र के पंजाबी कालोनी मुहल्ला स्थित एक किराये में रहने वाले एक युवक को फर्जीवाडा के आरोप में घेर लिया और सूचना देकर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया. आरोपित की पहचान मुजफ्फरपुर जिला के गायघाट थाना के रेलानगर निवासी मदनेन्द्र कुमार सिंह के पुत्र राजेश रौशन के रूप में हुई है. पीड़ित जहानाबाद के घोसी थाना के जेतिपुर कुरुआ निवासी पन्ना लाल ने स्थानीय पुलिस को एक लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज करायी है. इसमें आरोपित राजेश रौशन के द्वारा युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर ठगी का शिकार बनाकर करीब एक करोड़ के धोखाधड़ी का आरोप लगाया. इसमें उसके साथ फर्जीवाड़ा में शामिल तीन चार अन्य लोगों को भी शामिल किया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोपित ने नौकरी के नाम पर जालसाजी कर अभ्यर्थियों के एनपीएस कार्ड भी बना दिया था. स्थानीय पुलिस इस मामले में जांच कर रही है. थानाध्यक्ष आशुतोष कुमार ने बताया कि आवेदन के आलोक में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी. पुलिस हिरासत में आरोपित से पूछताछ जारी है क्लर्क के लिए छह लाख और चपरासी के लिए चार लाख डिमांड, झांसा देकर अभ्यर्थियों से करीब एक करोड़ वसूला

दर्ज प्राथमिकी में पीड़ित पन्नालाल ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व जहानाबाद के अतियामा गांव के रहने वाले अपने मित्र विमलेश कुमार के साथ किसी के काम के सिलसिले में जान पहचान के धर्मेन्द्र कुमार से पटना में मुलाकात किया. बातचीत के दौरान धर्मेन्द्र ने बताया कि किसी को सरकारी नौकरी चाहिए तो उसके पास एक व्यक्ति है. जो नौकरी लगवाता है और इसके बदले रुपये लेता है. बाद में धर्मेन्द्र ने अमित पाण्डेय नाम के एक व्यक्ति से मुलाकात कराया. अमित पाण्डेय ने सरकारी नौकरी के सिलसिले में बातचीत किया और बताया कि स्वास्थ्य विभाग में कर्ल्क, चपरासी के पद अभी बहाली हो रही है, इसमें उसका सेटिंग है. अगर रुपये मिला तो वह बीस लोगों की बहाली करवा सकते हैं. अभ्यर्थियों को क्लर्क के लिए छह लाख और चपरासी के लिए चार लाख रुपये का प्रबंध करना होगा. इसके बाद बिमलेश और पन्नालाल अपने घर आकर परिवार के लोगों से सहमति बनाई और नौकरी के नाम पर रिश्तेदारों से सत्तर लाख रुपये एकत्र किया. इसके बाद अमित पाण्डेय को बुलाकर सत्तर लाख नकद और कुछ उसके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया. इसके बाद अमित पाण्डेय ने नौकरी के लिए रुपये देने वाले सभी अभ्यर्थियों को वैशाली जिला में स्थित भगवान प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र बुलाया और वहां पीएचसी में कार्यरत अपने शागिर्द स्वास्थ्य कर्मी अजय कुमार से अभ्यर्थियों क मुलाकात कराई. अजय कुमार ने एक दैनिक रजिस्ट्रर पर अभ्यर्थियों की उपस्थिति बनाई और आवेदन पर हस्ताक्षर कराया. अभ्यर्थियों को पूरा विश्वास था कि स्वास्थ्य विभाग की उनकी नौकरी लग गई है. इसके बाद अमित पाण्डेय ने दुबारा अभ्यर्थियों से बीस लाख रुपये नकद और कुछ बैंक अकाउंट पर ट्रांसफर करा लिया. इसके बाद काफी समय बाद भी जब अभ्यर्थियों को काम नहीं मिला तो वह अमित पाण्डेय पर शक करने लगे. अमित पाण्डेय धीरे धीरे अभ्यर्थियों से दूरी बना रहा था. वह आज कल की बात कहकर टाल मटोल कर रहा था. बाद में उसने अपना मोबाइल भी बंद करा लिया. निजी स्तर पर खोजबीन के बाद उक्त आरोपित का समस्तीपुर पंजाबी कालोनी में सुराग मिला. तब पता चला कि अमित पाण्डेय के नाम से बात करने वाला आरोपित राजेश रौशन है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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