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शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मी विद्यालय का नहीं करेंगे निरीक्षण

शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मियों द्वारा निरीक्षण के दौरान बरती जा रही कोताही को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा विभाग ने नयी व्यवस्था के तहत विद्यालयों का निरीक्षण करने का आदेश जारी किया है.

समस्तीपुर : शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मियों द्वारा निरीक्षण के दौरान बरती जा रही कोताही को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा विभाग ने नयी व्यवस्था के तहत विद्यालयों का निरीक्षण करने का आदेश जारी किया है. अब जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी को विद्यालय निरीक्षण के लिए टास्क सौंपा है. उन्होंने जिलाधिकारी को इस संबंध में पत्र भी भेजा है. इसमें उनसे कहा गया है कि वे अपने स्तर से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को छोड़कर अन्य पदाधिकारियों व पर्यवेक्षकों से विद्यालयों का निरीक्षण करायें. विभागीय सचिव ने कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय में निरीक्षण व अनुश्रवण की व्यवस्था की गयी है. विभाग द्वारा चलाये गये सघन निरीक्षण के बाद भी विभाग के कमांड व कंट्रोल सेंटर (टोल फ्री नंबर 14417 व 18003454417) पर विद्यालय की व्यवस्था पर शिकायतें आ रही हैं. इतने निरीक्षण के बाद ऐसी शिकायतें सामान्यत: नहीं होनी चाहिए थी. ऐसे में यह स्पष्ट है कि विद्यालयों के निरीक्षण व अनुश्रवण में गड़बड़ी हुई है. इससे यह आवश्यकता महसूस की गयी है कि जिलाधिकारी अपने स्तर से विद्यालयों का निरीक्षण करायें. शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को छोड़कर अन्य पदाधिकारियों व पर्यवेक्षकों को यह जिम्मेवारी दी जानी चाहिए. अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि निरीक्षण व अनुश्रवण कार्य के लिए राज्य स्तर पर प्राप्त शिकायत पत्र जिला पदाधिकारी को उनके नोडल पदाधिकारी के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा. उन्होंने जिलाधिकारी से शिक्षा विभाग की शिकायतों के अनुश्रवण के लिए अपने-अपने जिले में एक नोडल पदाधिकारी (उप समाहर्ता) अविलंब नामित करने को कहा है. विभागीय आदेश में कहा गया है कि गैर शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों से इन शिकायत पत्रों की स्वतंत्र जांच कराई जाये और ई-शिक्षा कोष के माध्यम से इन प्रतिवेदन को सीधे उन्हें उपलब्ध करायी जाये. इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए अपर मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग की ओर से समन्वय के लिए जन शिक्षा निदेशक सह अपर सचिव अनिल कुमार को नामित किया है. इधर, सरकार के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों के योगदान के बाद ही रोस्टर पंजी में उनका नाम, योगदान की तिथि, वास्तविक कोटि एवं अनुशंसित कोटि को दर्ज किया जायेगा. सामान्य प्रशासन विभाग ने जिलाधिकारी को रोस्टर पंजी बनाने को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है. राज्य में रोस्टर पंजी तैयार करने को लेकर अबतक 1985 में जारी दिशा-निर्देशों का पालन होता आ रहा था. विभागीय कार्यशालाओं एवं कर्मचारियों और पदाधिकारियों से विमर्श के बाद विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का निर्णय लिया गया. विभाग का नया दिशा-निर्देश सरकार के विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी एवं पदाधिकारी के रोस्टर तैयार करने और रिक्त पदों के रोस्टर क्लीयरेंस में भी सहायक होगा. जानकारी के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव ने इस दिशा-निर्देश को जारी कर दिया है.

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