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बिहार के इस जिले की बेटी ने UPSC में मारी बाजी, 36वीं रैंक लाकर बनी IAS

Updated at : 06 Mar 2026 7:19 PM (IST)
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dipali mahato ias samastipur

अपने माता-पिता के साथ दीपाली महतो

UPSC Toppers From Bihar: समस्तीपुर के रोसड़ा शहर की बेटी डॉ. दीपाली महतो ने यूपीएससी 2025 के परिणाम में 36वां रैंक हासिल कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उनकी इस सफलता से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे समस्तीपुर जिले में खुशी की लहर है.

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UPSC Toppers From Bihar: बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा शहर की बेटी डॉ. दीपाली महतो ने अपनी मेहनत और लगन से एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की वर्ष 2025 की परीक्षा के जारी परिणाम में उन्होंने 36वां रैंक प्राप्त किया है. इस शानदार सफलता के साथ उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार का बल्कि पूरे रोसड़ा और समस्तीपुर जिले का नाम रोशन कर दिया है.

यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए वर्षों की मेहनत, धैर्य और मजबूत संकल्प की जरूरत होती है. डॉ. दीपाली महतो ने इन सभी चुनौतियों को पार करते हुए यह मुकाम हासिल किया है.

अब आईएएस बनकर करेंगी देश की सेवा

डॉ. दीपाली महतो की इस उपलब्धि के बाद अब वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी बनेंगी. एक आईएएस अधिकारी के रूप में वह राज्य और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. उनकी सफलता से क्षेत्र के युवाओं में भी एक नई प्रेरणा जगी है.

परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं

दीपाली महतो के पिता संजय कुमार महतो सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी हैं. उनकी माता का नाम सुलेखा देवी है. बेटी की इस सफलता से पूरा परिवार बेहद खुश है. परिवार के सदस्यों ने कहा कि दीपाली ने अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है.

रोसड़ा के कटहरबन्नी मोहल्ला निवासी स्वर्गीय वीरेंद्र महतो और स्वर्गीय राजकुमारी देवी की वह पौत्री हैं. परिवार का कहना है कि दीपाली शुरू से ही पढ़ाई में काफी मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही हैं.

पूरे जिले में खुशी का माहौल

डॉ. दीपाली महतो की सफलता की खबर मिलते ही रोसड़ा और समस्तीपुर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई. लोग इसे पूरे जिले के लिए गर्व की बात बता रहे हैं.

युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

डॉ. दीपाली महतो की सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है. आज वह सिर्फ अपने परिवार की नहीं, बल्कि पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि छोटे शहरों से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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