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कक्षा छठी, सातवीं व आठवीं में भी लागू होगी कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा

Updated at : 12 Nov 2024 11:19 PM (IST)
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कक्षा छठी, सातवीं व आठवीं में भी लागू होगी कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा

सभी प्रारंभिक विद्यालयों की कक्षा छठी, सातवीं और आठवीं में भी कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा लागू की जायेगी, ताकि इन कक्षाओं के बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा का लाभ मिल सके.

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समस्तीपुर : सभी प्रारंभिक विद्यालयों की कक्षा छठी, सातवीं और आठवीं में भी कंप्यूटर विज्ञान की शिक्षा लागू की जायेगी, ताकि इन कक्षाओं के बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा का लाभ मिल सके. विभागीय जानकारी के अनुसार, इसकी तैयारी की जा रही है और नए सत्र में लागू की जायेगी. यह ब्रिज कोर्स होगा. इसके बाद निचली कक्षाओं में बच्चों को कंप्यूटर विज्ञान की जानकारी देने की व्यवस्था होगी. अभी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर विज्ञान का पाठ्यक्रम लागू है. इसके लिए कंप्यूटर विज्ञान की किताब भी प्रकाशित कर विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई है. सरकार की प्राथमिकता में है कि सरकारी विद्यालयों के बच्चे भी कंप्यूटर शिक्षा में पीछे नहीं रहें. डीपीओ एसएसए मानवेंद्र कुमार राय ने बताया कि कंप्यूटर साक्षरता आज के समय में एक बुनियादी जरूरत है. कंप्यूटर शिक्षा से छात्रों को डिजिटल परिदृश्य में बेहतर विचारक, समस्या समाधानकर्ता, और प्रभावी संचारक बनने में मदद मिलती है. कंप्यूटर शिक्षा से छात्रों को तेजी से बढ़ते डिजिटल कार्य बल में कामयाब होने के लिए तैयार किया जाता है. कंप्यूटर शिक्षा से छात्रों को अनुकूलनीय और तकनीकी रूप से कुशल होने में मदद मिलती है. साथ ही कंप्यूटर शिक्षा से छात्रों को नवीनतम प्रगति से अवगत रखने में मदद मिलती है. सभी स्कूली बच्चों के लिए आधार कार्ड बनाना अनिवार्य हो गया है.

नंवबर-दिसंबर तक सभी बच्चों के आधार कार्ड बनाने के निर्देश दिए

शिक्षा विभाग ने नंवबर-दिसंबर तक सभी बच्चों के आधार कार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही जिलाधिकारियों को छूटे हुए स्कूली बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में तेजी लाने को कहा गया है. स्कूल में प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य है. इसके लिए जरूरी है कि जिन बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं, उनके जन्म प्रमाण पत्र भी बने. बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जल्दी बने, इसके बारे में शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है. होमवर्क व डायरी की जांच और अभिभावकों को जानकारी देना आवश्यक है. विभाग के अनुसार कक्षाओं में बच्चों को जो होमवर्क दिया जाता है, उसकी जांच शिक्षक द्वारा होनी चाहिए. बच्चों की डायरी की भी जांच होनी चाहिए कि उसमें जो सुझाव दिए गए उसे बच्चे के अभिभावक ने देखा या नहीं. अभिभावकों की बैठक में भी बच्चों के होमवर्क और डायरी के बारे में जानकारी देनी चाहिए. यह बच्चों की पढ़ाई में गुणात्मक सुधार के लिए भी जरूरी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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