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पिछले 24 घंटे में बारिश से दो बार डूबा शहर, नगर निगम की खुली पोल

Updated at : 30 Jun 2024 11:32 PM (IST)
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पिछले 24 घंटे में बारिश से दो बार डूबा शहर, नगर निगम की खुली पोल

मॉनसून के आगमन के बाद पिछले 24 घंटे में दो बार हुई बारिश ने दोनों बार शहर की सड़कों को डूबाकर रख दिया. कई घरों में पानी घुस गये.

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समस्तीपुर : मॉनसून के आगमन के बाद पिछले 24 घंटे में दो बार हुई बारिश ने दोनों बार शहर की सड़कों को डूबाकर रख दिया. कई घरों में पानी घुस गये. बारिश ने नगर निगम के व्यवस्था की पोल खोलकर रखी है. नाले के निर्माण पर हुए करोड़ों रुपये खर्च लोगों को व्यर्थ साबित हुआ. वहीं, नाले की उड़ाही के नाम पर किये गये खर्च का भी कोई मतलब नहीं सिद्ध हुआ. समस्तीपुर-मुसरीघरारी मुख्य सड़क सहित शहर की तमाम सड़कों पर बारिश के बाद घंटों दो से ढाई फीट पानी लगा रहा. कई निचले घरों में पानी घुस गया. वहीं, कई लोगों का पूरा कैंपस डूब रहा. कई दुकानों के भीतर पानी जाने से दुकानदारों को बहुत क्षति हुई है. कई जगह नाले के ऊपर ढक्कन नहीं रहने के कारण लोग दुर्घटना का शिकार हुए. काशीपुर गर्ल्स हाईस्कूल के सामने गहरे खुले नाले में एक व्यक्ति गिर गया. लोगों की मदद से उसे बाहर निकाला गया. वह नाले का गंदा पानी भी कई घूंट पी लिया था. बाद में लोगों ने इस जगह बांस के डंडे में लाल झंडा लगाकर लोगों को सचेत किया. समस्तीपुर-मुसरीघरारी पथ पर विवेक बिहार चौराहा पर ढाई फीट से ऊपर पानी लगा हुआ था. वहीं, पुरानी वीमेंस कॉलेज रोड में कई दुकानों व डॉक्टर के कैंपस में पानी घुस गया था. आदर्शनगर में मुख्य सड़क से लेकर कई गलियों में पानी लगा रहा. बारह पत्थर मोहल्ले, काशीपुर के सभी इलाकों सहित गुदरी बाजार भी जलमग्न रहा. मोहल्ले के लोगों को सड़क पर आवाजाही में सबसे अधिक परेशानी नाले के टूटे ढक्कनों से हो रही है. विदित हो कि मॉनसून के आने के बाद शनिवार की देर शाम पहली बारिश हुई थी. एक घंटे झमाझम बारिश में ही शहर की सभी सड़कें जलमग्न हो गयी थी. वहीं रविवार की दोपहर तकरीबन दो घंटे हुई झमाझम बारिश ने तो पूरे शहर की सड़कों को डूबों कर रख दिया. लोगों का कहना है नगर निगम जलनिकासी के नाम लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन वर्षा के बाद सड़कें जलमग्न हो जाती है. लोगों के घरों में पानी चला जाता है.

मॉनसून की झमाझम बारिश किसानों के खिले चेहरे

समस्तीपुर : बारिश के बाद गांव की गलियां भी भले ही जलमग्न हो गयी. कई इलाकों की सड़कों पर जलजमाव हो गया है, लेकिन आकाश की ओर टकटकी लगाये किसानों के चेहरे खिल गये हैं. लगातार सुखाड़ की स्थिति बनी हुई थी. किसानों के खेत में लगे बिचड़े बारिश के अभाव में मुरझाने लगे थे. लेकिन, पिछले 24 घंटे में हुई भारी बारिश से किसानों के खेतों में जान ला दी है. खरीफ मक्का, सब्जी सहित कई फसलों को बारिश से बहुत लाभ हुआ है. किसानों का कहना है कि सिंचाई के पैसे बचे हैं. वहीं, नमी आने से खरीफ के लिए खेतों की जुताई करने के में सुविधा होगी. इस बार जिले में जिला कृषि विभाग के द्वारा 67777.15 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा है. अगर इस तरह मॉनसून मेहरबान रहा, तो धान की अच्छी पैदावार की संभावना है. वर्षा के बाद किसानों अपनी खेतों के मेड़ों को दुरूस्त कर पानी को खेते में रोकने की कवायद में जुटे हैं. इधर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसानों के पास धान का बिचड़ा तैयार है, वे नीची व मध्यम जमीन में वर्षा का लाभ उठाते हुए धान की रोपनी करें. जिन क्षेत्रों में कम बारिश हुई है. वहां किसान के पास अगर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो वैसे किसान भी धान की रोपाई करें. धान की रोपाई के समय उर्वरकों का व्यवहार सदैव मिट्टी जांच के आधार पर करें. यह मिट्टी जांच नहीं करायी गयी, हो तो मध्यम एवं लंबी अवधि की किस्मों के लिए 30 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम स्फुर व 30 किलोग्राम पोटाश के साथ 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट या 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर चिलेटेड जिंक का व्यवहार करें. जिन किसानों से धान का बिचड़ा नहीं गिराया है, वे यथा शीघ्र धान का बिचड़ा गिरायें. धान की आगात किस्में प्रभात, धनलक्ष्मी, रिछारिया, साकेत-4, राजेन्द्र भगवती तथा राजेन्द्र नीलम उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित हैं.

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