Samastipur News:स्कूलों में चेतना सत्र बच्चों को दे रहा ज्ञान

जिले के सरकारी स्कूलों के बच्चों से जब मिलें तो उन्हें हल्के में न लें क्योंकि उन्हें 20 से अधिक जनरल नॉलेज के सवालों का जवाब याद है.
Samastipur News: समस्तीपुर : जिले के सरकारी स्कूलों के बच्चों से जब मिलें तो उन्हें हल्के में न लें क्योंकि उन्हें 20 से अधिक जनरल नॉलेज के सवालों का जवाब याद है. गांधी से लेकर कई विचारकों की सुक्ति से लेकर संविधान का प्रस्तावना कंठस्थ है. हिंदी और अंग्रेजी वर्णवाला से पांच-पांच शब्द बना लेते हैं. गणित के सूत्र से सवालों को मौखिक हल करते हैं. किताबों की कहानियां जुबानी याद है. ऐतिहासिक पुरुषों की जीवन गाथा भी इन बच्चों ने आत्मसात कर लिया है. सरकारी विद्यालयों के छात्रों में यह बदलाव चेतना सत्र की वजह से आया है. जिले के सरकारी स्कूलों में चेतना सत्र चलाया जा रहा है. पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चे इस सत्र में हिस्सा लेते हैं. हर दिन चेतना सत्र में छात्रों को कुछ अलग पढ़ाया जाता है. इसमें छात्र एक दूसरे से सवाल करते हैं फिर उसका जवाब भी देते हैं. यहीं नहीं अपने आत्म चिंतन से शब्दों का निर्माण करके भी चेतना सत्र में रखते हैं. इससे न सिर्फ छात्रों के अंदर आत्मविश्वास बढ़ा है बल्कि पढ़ाई के प्रति भी छात्र काफी जागरूक होने लगे हैं. उत्क्रमित मध्य विद्यालय लगुनियां सूर्यकण्ठ के एचएम सौरभ कुमार बताते हैं कि चेतना सत्र में गुरुवंदना, बिहार प्रार्थना, जनरल नॉलेज, प्रेरणादायक कहानी, गांधी की सूक्ति, वंदे मातरम, आत्म चिंतन के साथ-साथ ड्रम की थाप पर पीटी भी होती है. इससे न सिर्फ छात्रों के अंदर अनुशासन आता है बल्कि उनका शारीरिक व्यायाम भी होता है. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि चेतना सत्र बच्चों में भागीदारी, नियमितता, समयबद्धता, सजगता, जिम्मेवारी, अपने कार्य के प्रति कटिबद्धता एवं प्रवीणता, वाकपटुता, अनुशासन, नेतृत्व कौशल और प्रेरणा भरने का कार्य करती है. चेतना सत्र बच्चों के झिझक तोड़ने का काम रामबाण की तरह करती है. बच्चे शिक्षकों से बेहिचक संवाद करते हैं, ये है चेतना सत्र की प्रक्रियाओं की ताकत. इससे बच्चों में शारीरिक, मानसिक तथा भावात्मक विकास होता है. चेतना सत्र में आम तौर से साफ-सफाई के बाद प्रार्थना, बिहार राज्य प्रार्थना, बिहार राज्य गीत, अभियान गीत, प्रेरणा गीत, भारतीय संविधान की प्रस्तावना, राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान जन-गण-मन गण मन आदि का कार्यक्रम किए जाते हैं. मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य पर भी बच्चों के द्वारा बातचीत की जाती है. सामान्य तौर से विभिन्न तरह के क्रियाकलाप के बाद अंत में राष्ट्रगान गाया जाता है, उसके बाद बच्चे कतारवद्ध होकर बिल्कुल अनुशासन में वर्ग-कक्ष में जाते हैं. डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन ने कहा कि यदि चेतना सत्र बेहतर होगा तो दिन भर का क्रियाकलाप भी बेहतर होगा क्योंकि चेतना सत्र शिक्षकों एवं बच्चों में स्फूर्ति लाने का कार्य करती है. जो भी कार्य होगा, उमंग-तरंग से होगा. कोई भी कार्य बोझिल महसूस नहीं होगा. एक आनंद का वातावरण होगा और सीखने का उचित माहौल बना रहेगा. सीखना आनंददायी माहौल में बेहतर होता है.बिना आनंद के सीखना टिकाऊ नहीं होता.
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