Anti drug squads will be formed against drugs in schools: स्कूलों में नशे के खिलाफ बनेंगे एंटी ड्रग स्क्वायड

Anti drug squads will be formed against drugs in schools
Anti drug squads will be formed against drugs in schools: समस्तीपुर : नशा, एक ऐसा शब्द जिसे लेकर आज हर टीनएजर बच्चे के माता-पिता चिंतित हैं. यह चिंता इस बात की है कि कहीं उनका बच्चा भी किसी नशे की गिरफ्त में न आ जाये. वर्ग 7वीं-10वीं तक आते-आते बच्चे स्मोकिंग और नशीले पदार्थों के आदी हो जाते हैं. थोड़ी-सी समझदारी और सही तरीके से बच्चाें को गाइड किया जाये तो वे किसी भी प्रकार के व्यसन से दूर रह सकते हैं. इन बच्चों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को रोकने के लिए केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बड़ा कदम उठाने जा रहा है. स्कूलों में एंटी ड्रग स्क्वायड का गठन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं. नशा विरोधी दस्तों को स्कूलों के भीतर, स्कूल आने-जाने के रास्तों और आसपास की दुकानों में संदिग्ध गतिविधि की निगरानी का काम सौंपा जायेगा. नशा विरोधी दस्ते का नेतृत्व स्कूल के प्रिंसिपल करेंगे. इसमें 2-3 स्टाफ सदस्य और 2 से 3 छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे. छात्र प्रतिनिधियों को स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी), अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) या पार्षद जैसे निकायों से चुना जा सकता है. स्कूलों को ऐसी प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां छात्र-कर्मचारी गुमनाम रूप से किसी भी ड्रग से संबंधित रिपोर्ट कर सकते हैं. मासिक आधार पर जानकारी की एंटी-ड्रग स्क्वायड समीक्षा करेंगे. जरूरी हुआ तो स्क्वायड आगे की जांच और कार्रवाई के लिए पुलिस को जानकारी देंगे. छात्रों को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में शिक्षित करने के लिए वाद-विवाद और निबंध लेखन प्रतियोगिता करवाई जायेगी. दरअसल, सीबीएसई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के साथ बोर्ड समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर (एमओयू) करेगा. इसके तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को ड्रग एब्यूज और ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ जागरूक किया जायेगा.
Anti drug squads will be formed against drugs in schools: स्कूली शिक्षा के दौरान बुरी संगत, पियर प्रेशर के कारण बच्चे गलत और बुरी आदतों के शिकार हो जाते हैं.
स्कूली शिक्षा के दौरान बुरी संगत, पियर प्रेशर के कारण बच्चे गलत और बुरी आदतों के शिकार हो जाते हैं. बच्चों में स्कूल स्तर से ही ड्रग के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने, इसकी तस्करी में पकड़े जाने के बाद मिलने वाली सजा से बच्चों को अवगत कराने के लिए सीबीएसई, एनसीबी के साथ एमओयू करने की तैयारी में है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल इकाई की टीम संबंधित राज्य के स्कूलों के साथ समन्वय स्थापित करेगी. टीम बच्चों को ड्रग्स को ना कहने और स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए जागरूक करेगी. शहर के ताजपुर रोड स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल के निदेशक मो. आरिफ ने बताया कि नशा करने वालों में किशोरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. आखिर लोग इस नशे को अपना साथी क्यों बना रहे है, जो समय बीतने पर उनकी सेहत, उम्र और चेतना सब सोख लेता है. इसके कई मिथ भी हैं. काउंसलिंग करने वाले साइकोलॉजिस्ट यह मानते हैं कि कम उम्र के बच्चों को यह लगता है कि एक बार ड्रग्स लेने में कोई हर्ज नहीं और वह 1-2 बार ऐसा करने के बाद इस आदत को छोड़ देंगे, पर वे इसकी गिरफ्त में फंस जाते हैं.
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