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कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के वैज्ञानिकों की टीम ने किया भ्रमण

Updated at : 11 Jun 2025 5:11 PM (IST)
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कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के वैज्ञानिकों की टीम ने किया भ्रमण

दो टीमों के द्वारा 6 पंचायत का भ्रमण कर किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई गई.

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पूसा . विकसित कृषि संकल्प अभियान के 14वें दिन कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के दो टीमों के द्वारा 6 पंचायत का भ्रमण कर किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई गई. टीम वन जिसको इंजीनियर बिनीता कश्यप लीड कर रही थी. इन्होंने कल्याणपुर के खरसंड पूर्वी सिमरिया भिंडी एवं पुरुषोत्तमपुर पंचायत में यह कार्यक्रम आयोजित किया. इसमें कृषि विज्ञान केंद्र से सुमित कुमार सिंह डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से डॉ महेश कुमार, डॉ अब्बास अहमद एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूसा क्षेत्र से डॉ सतीश नायक मौजूद रहे. टीम दो जिसको धीरू कुमार तिवारी एवं भारती उपाध्याय कृषि विज्ञान केंद्र व डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय पूसा से डा दिनेश रजक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा से डॉ तमोगना ने पटोरी के जोरपुरा दरबार एवं बहादुरपुर पटोरी पंचायत में कार्यक्रम किया. वैज्ञानिकों के द्वारा नई-नई तकनीक के बारे में किसानों को बताया गया. फीडबैक कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों से कृषि में होने वाले विभिन्न समस्याओं की जानकारी लेने का प्रयास हुआ. किसानों ने मुख्य रूप से बैगन में फल और तना छेदक की समस्या बताई. इसके समाधान के लिए फिरेमोन ट्रैप को एक एकड़ के खेत में लगभग 12 से 14 की संख्या में लगाने का सुझाव दिया गया. अधिक समस्या देखने पर उसमें लेमडासाइहैलोथि्न केमिकल का एक एम 3 लीटर पानी में स्प्रे करने का सुझाव दिया गया. साथ ही साथ परवल में नीमाटोड की समस्या तथा फ्रूट फ्लाई किट से किसानों ने अपनी समस्या के बारे में सभी को बताया. जिसके समुचित समाधान की जानकारी वैज्ञानिकों के द्वारा उपलब्ध कराई गई. इसके साथ ही किसानों ने विभिन्न फसलों में विभिन्न प्रकार के खरपतवार की समस्या की जानकारी वैज्ञानिकों को उपलब्ध कराई. वैज्ञानिकों के द्वारा पूसा विश्वविद्यालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थाओं द्वारा विकसित धान-मक्का के अलावा मोटे अनाज एवं अन्य फसलों की प्रजातियां की जानकारी व खेत के समतलीकरण की महत्ता पर प्रकाश डाला गया. फलदार पौधों में फलों की तुड़ाई के बाद उसका प्रबंधन कैसे किया जाये इसकी भी जानकारी उपलब्ध कराई गई. फलमक्खी के समाधान के लिए फ्रूट फ्लाई ट्रैप को परवल में लगाने का सुझाव दिया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DIGVIJAY SINGH

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