मध्याह्न भोजन में शिक्षकों को लगाने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर

Published at :14 Sep 2016 4:09 AM (IST)
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मध्याह्न भोजन में शिक्षकों को लगाने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर

समस्तीपुर : पिछले सप्ताह पांच दिनों तक जिले में मध्याह्न भोजन योजना ठप रहा. जिले के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने एक स्वर से कहा कि वे लोग मध्याह्न भोजन योजना का संचालन नहीं करेंगे. हालांकि, शिक्षक संघों ने तीन महीने पहले ही अल्टीमेटम शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों एवं जिलाधिकारी को दिया था. […]

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समस्तीपुर : पिछले सप्ताह पांच दिनों तक जिले में मध्याह्न भोजन योजना ठप रहा. जिले के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने एक स्वर से कहा कि वे लोग मध्याह्न भोजन योजना का संचालन नहीं करेंगे. हालांकि, शिक्षक संघों ने तीन महीने पहले ही अल्टीमेटम शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों एवं जिलाधिकारी को दिया था. बावजूद विभाग द्वारा कोई अल्टनेट व्यवस्था नहीं की गयी, बल्कि शिक्षकों को मनाकर फिर से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन कराया.

पर सवाल यह उठता है कि आखिर किस परिस्थिति में शिक्षकों को मध्याह्न भोजन योजना में सम्मिलित कर रखा गया है. केंद्र व राज्य सरकार के आदेश के बावजूद शिक्षकों को मध्याह्न भोजन योजना के संचालन की जिम्मेवारी क्यों दी गयी, जबकि हाइ कोर्ट ने भी आदेश दे रखा है कि शिक्षकों को मध्याह्न भोजन योजना के संचालन से दूर रखा जाये. भारत सरकार के संयुक्त सचिव अनंत कुमार सिंह ने 8 अक्तूबर 2009 को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर स्पष्ट कहा था कि मध्याह्न भोजन योजना के गाइड लाइन के मुताबिक शिक्षकों को मध्याह्न भोजन बनवाने एवं इसकी निगरानी से दूर रखने का स्पष्ट आदेश है. उन्होंने इसको लेकर हुई कई बैठकों का हवाला देते हुए कहा था कि मीटिंग में हमेशा इन बिंदुओं को उठाया जा रहा है कि शिक्षकों को मध्याह्न भोजन योजना की पूरी जिम्मेवारी दे दी गयी है,

जिससे स्कूलों में बच्चों का पठन पाठन प्रभावित होता है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये जरूरी है कि शिक्षकों को इस योजना से दूर रखा जाये. इसी तरह का आदेश राज्य सरकार के तत्कालीन निदेशक प्राथमिक शिक्षा अशोक कुमार सिंह ने भी जारी किया था. हाईकोर्ट में शिक्षक संघ के द्वारा दायर सीडब्लूजेसी 9487/05 में पारित आदेश के आलोक में शिक्षकों को इस योजना से दूर रखने का आदेश दिया था. 19 अप्रैल 2006 को पत्रांक 587 के माध्यम से उन्होंने आदेश जारी करते हुए कहा था कि मध्याह्न भोजन योजना में शिक्षकों को संलग्न नहीं करने का आदेश दिया गया है. हां, शिक्षकों को सिर्फ इतना करना है कि तैयार भोजन की गुणवत्ता की जांच एवं बच्चों के बीच वितरण सुनिश्चित करना तथा तैयार भोजन जो बच्चों के बीच वितरित किये जा रहे हैं उसका निरीक्षण. सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि उच्च न्यायालय के आदेश के साथ साथ केन्द्र व राज्य सरकार का भी पत्र है, बावजूद शिक्षकों को इस योजना से अलग नहीं रखा जा रहा है. निसंदेह शिक्षकों के मध्याह्न भोजन योजना में फंसे रहने के कारण बच्चों को सही ढंग से पढाई नही हो पाती है. इस बात को शिक्षक नेता भी स्वीकार करते हैं.

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