सेवा पुस्तिका खोलने के लिये मांगा जा रहा नजराना

Published at :06 Nov 2015 5:24 AM (IST)
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सेवा पुस्तिका खोलने के लिये मांगा जा रहा नजराना

समस्तीपुर : भले डीइओ वेतन निर्धारण कर पारदर्शी तरीके से भुगतान का लाख दावा करें लेकिन, यह भी सच है कि सेवा पुस्तिका की शर्त लगाकर उन्होंने शिक्षकों के शोषण के द्वार खोल दिये हैं. डीइओको नहीं पता कि उनके इस आदेश से सेवा पुस्तिका खुलवाने में कहां-कहां नजराना चुकाना पड़ रहा है. माध्यमिक शिक्षकों […]

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समस्तीपुर : भले डीइओ वेतन निर्धारण कर पारदर्शी तरीके से भुगतान का लाख दावा करें लेकिन, यह भी सच है कि सेवा पुस्तिका की शर्त लगाकर उन्होंने शिक्षकों के शोषण के द्वार खोल दिये हैं. डीइओको नहीं पता कि उनके इस आदेश से सेवा पुस्तिका खुलवाने में कहां-कहां नजराना चुकाना पड़ रहा है.

माध्यमिक शिक्षकों को तो बीइओ से पाला नहीं पड़ रहा है. लेकिन, प्रखंड और पंचायत शिक्षकों की तो जेब अलग ढीली हो रही है. बताते चलें कि वारिसनगर प्रखंड के शेखोपुर पंचायत सचिव की शिकायत प्राथमिक विद्यालय अनुसूचित जाति बेगमपुर वार्ड 13 के पंचायत शिक्षक भवेश कुमार सिंह ने की है.
उन्होंने शिकायत पत्र में कहा है कि विगत 20 अगस्त से वे सेवा पुस्तिका पर हस्ताक्षर उक्त पंचायत सचिव लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन अब तक कार्य नहीं किया है. साथ ही उनके द्वारा दो प्रति सेवा पुस्तिका ले लिया गया है. अब पंचायत सचिव द्वारा आर्थिक मांग की जा रही है.
आवेदन को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने डीइओ जांच के लिए प्रेषित किया है. सेवा पुस्तिका के नाम पर शोषण के इसी द्वार को बंद करने के लिए शिक्षक संघों ने डीइओको कड़ी चेतावनी तक दे डाली है.
शिक्षक संघों का स्पष्ट पक्ष है कि पहले वेतन निर्धारित हो. सेवा पुस्तिका पर इसे बाद में अकित किया जा सकता है. लेकिन, सेवा पुस्तिका के अभाव में किसी का वेतन निर्धारण नहीं करना ना सरकारी निर्देशों की अवहेलना है. यह उगाही के एक बड़े गोरखधंधे की ओर भी संकेत करता है.
जिला शिक्षा कार्यालय और स्थापना कार्यालय में थ्री इन वन बने कई बाबुओं ने हाकिमों को बरगला कर इस प्रकार का आदेश जारी कराया है. वेतन निर्धारण तो प्रपत्र और सरकारी फार्मेट के आधार पर होना है.
इस काम में बीइओ व पंचायत सचिव सबसे आगे हैं. सेवा पुस्तिका मूल रूप में प्राप्त करने की प्राप्ति शिक्षकों को नहीं दी जाती. सेवा का मूल दस्तावेज शिक्षक किसी को देने में हिचिकचा रहे हैं. उनका तर्क है कि प्रपत्र के आधार पर वेतन निर्धारण हो.
सेवा पुस्तिका अगर आवश्यक है तो छाया प्रति लें. निर्धारण के बाद शिविर लगाकर इस पर वेतन अंकित कर दिया जाय. जिला माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है सेवा पुस्तिका मूल रूप में तुरंत लेने का सरकारी आदेश नहीं है. बिहार के अन्य जिलों में वेतन निर्धारण कर भुगतान भी कर दिया गया. लेकिन, ऐसी शर्त नहीं लगायी गयी.
जिला शिक्षा पदाधिकारी बीके ओझा शिक्षकों के आरोप को सही नहीं मानते. उनका कहना है कि वेतन निर्धारण प्रक्रि या में जो आदेश जारी किया गया है, वह सरकारी निर्देशों के अनुरूप है. जहां तक उगाही की बात है शिकायत मिलने पर जांचोपरांत कार्रवाई की जायेगी.
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