सड़क से नहीं हटे स्पीड ब्रेकर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना हाइकोर्ट ने जिले में एनएच व एसएच की सड़कों पर बिना वजह के स्पीड ब्रेकरों को हटाने का निर्देश दिया था. जिले में करीब आठ सौ स्पीड ब्रेकर हैं. आदेश मिलने के बाद भी जिला प्रशासन व पथ निर्माण विभाग के आलाधिकारी चुप बैठे हैं. बेवजह ब्रेकरों को हटाने से दुर्घटना कम होगी ही […]
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पटना हाइकोर्ट ने जिले में एनएच व एसएच की सड़कों पर बिना वजह के स्पीड ब्रेकरों को हटाने का निर्देश दिया था. जिले में करीब आठ सौ स्पीड ब्रेकर हैं. आदेश मिलने के बाद भी जिला प्रशासन व पथ निर्माण विभाग के आलाधिकारी चुप बैठे हैं. बेवजह ब्रेकरों को हटाने से दुर्घटना कम होगी ही साथ ही जाम से राहत मिलेगी.
समस्तीपुर : जिले से जुड़े एनएच व एसएच की सड़कों में कम ही स्पीड ब्रेकर देखने को मिलते हैं, लेकिन, गलियों की सड़कों पर जगह-जगह स्पीड ब्रेकर देखने को मिलते हैं. इनमें से अधिकांश जिला प्रशासन व पथ निर्माण विभाग की बिना सहमति के ही बनाया गया है.
हाइकोर्ट का आदेश आने के बाद भी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है. लिहाजा कोर्ट का आदेश महज ‘आदेश’ बन कर रह गया है.
जानकारी के मुताबिक जिले के विभिन्न सड़कों पर छोटे-बड़े करीब आठ सौ स्पीड ब्रेकर हैं. इन स्पीड ब्रेकरों की वजह से जाम तो लगता ही है. साथ ही इन स्थानों पर हादसे भी होते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से सड़कों से स्पीड ब्रेकर हटाने की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की जा सकी है. कुछ सड़कों पर से स्पीड ब्रेकर को हटाने की आवश्यकता है, लेकिन इसे हटाने को ले कर प्रशासन एवं विभाग सुस्त है.
अधिकांश स्पीड ब्रेकर मानक के अनुरूप नहीं
पथ निर्माण विभाग के द्वारा सड़कों पर वाहन की गति तोड़ने के लिए जो स्पीड ब्रेकर का निर्माण कराया गया है, उनमें से अधिकांश मानक के अनुरूप नहीं हैं. सड़क निर्माण से जुड़े संवेदक मानक को ताक पर रख कहीं कहीं एक से डेढ फुट ऊंची स्पीड ब्रेकर बना अपने कार्य को इतिश्री समझ लेते हैं.
इस वजह से अचानक तेज गति से आ रहे वाहन दुर्घटनाग्रस्त भी हो जाते हैं. जिले से गुजरने वाले खासकर स्टेट हाइवे पर बने ब्रेकर पर रंगरोगन नहीं होने से भी वाहन चालक एकाएक ब्रेकर पाकर दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं.
हालांकि कुछ पथों पर ब्रेकर काफी जरुरी भी है, जो तेज गति से आ रहे वाहन के गति पर अंकुश लगाते हुए सड़क दुर्घटना को रोकने में भी सहायक साबित होती है. सुदूर ग्रामीण इलाकों में बने स्पीड ब्रेकर का लाभ अपराधियों को भी मिल रहा है. वाहन की गति कम होते ही चालक को निशाना बना लूट लेते हैं.
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