मशरुम उत्पादन के क्षेत्र में अव्वल रहे कैजिया के लालबाबू

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पूसा. मशरुम उत्पादन के साथ साथ विभिन्न सब्जी के उत्पादन कर कैजिया के लाल बाबू सिंह एवं शोभा देवी आरएयू के क्षेत्र में अव्वल दर्जा प्राप्त की. बिहार के कूल 38 जिलों में चल रहे मशरुम उत्पादन आरएयू के मशरुम वैज्ञानिक डा. दयाराम के नेतृत्व में परचम लहड़ा रहा है. मशरुम उत्पादक लाल बाबू सिंह […]

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पूसा. मशरुम उत्पादन के साथ साथ विभिन्न सब्जी के उत्पादन कर कैजिया के लाल बाबू सिंह एवं शोभा देवी आरएयू के क्षेत्र में अव्वल दर्जा प्राप्त की. बिहार के कूल 38 जिलों में चल रहे मशरुम उत्पादन आरएयू के मशरुम वैज्ञानिक डा. दयाराम के नेतृत्व में परचम लहड़ा रहा है. मशरुम उत्पादक लाल बाबू सिंह का कहना है कि सौ क्विंटल कम्पोस्ट से बटन मशरुम की खेती किया. जितना होना चाहिए उतना मुनाफा तो नहीं हुआ पर कम लागत में अच्छी आमदनी मिला. प्रशिक्षण एवं कुशल तकनीक तो कृषि विश्वविद्यालय स्तर पर भरपूर मिला. स्वरोजगार को बढावा देने के लिए सरकारी स्तर पर किसी तरह के आर्थिक सहायता नहीं मिल पाया. जिससे हम उत्पादक लोग इस व्यवसाय से हतोत्साह बने हुए हैं. इसी व्यवसाय में लगे ठहरा के रविंद्र कुमार रवि, बहादुरपुर के सुधा देवी, इस व्यवसाय को आगे बढाने के लिय काफी जहमत उठाया पर सफलता नहीं मिल पाया. मशरुम उत्पादक लाल बाबू कहते है कि 1.5 लाख रुपये ब्याज पर लेकर लगाते रहेंगे. अन्य सब्जी के फसलों को भी वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर उत्पादन कर परिवार के भरण पोषण कर रहे हैं. इधर मशरुम प्रशिक्षण का दौड़ लंबी अवधि से चलकर चरम पर पहुंच गया है. अब खासतौर पर बीज निर्माण एवं कल्चर निर्माण पर विशेष रूप से कार्य किया जा रहा है.

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