मंदिर में साईं की मूर्ति स्थापित करना संस्कृति के खिलाफ : शंकराचार्य

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रोसड़ा. पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि किसी मंदिर में राम, कृष्ण, गणपति के साथ साईं बाबा की मूर्ति स्थापित करना वैदिक आर्य संस्कृति के खिलाफ है. महाप्रलय के बाद समृद्धि व निर्वाह देव को शक्ति के रूप में मंदिर में स्थापित किया गया जहां एक मात्र स्वामी सच्चिदानंद स्वरुपानंद सरस्वती […]

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रोसड़ा. पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि किसी मंदिर में राम, कृष्ण, गणपति के साथ साईं बाबा की मूर्ति स्थापित करना वैदिक आर्य संस्कृति के खिलाफ है. महाप्रलय के बाद समृद्धि व निर्वाह देव को शक्ति के रूप में मंदिर में स्थापित किया गया जहां एक मात्र स्वामी सच्चिदानंद स्वरुपानंद सरस्वती ही मान्य हैं. वे रविवार को पप्पू सिंह के आवासीय परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि शिक्षा राष्ट्र के उत्कर्ष की आधारशिला है. शिक्षित व्यक्ति ही विद्वान हैं जो पूरे राष्ट्र व विश्व को संमुन्नत करने में सक्षम होते हैं. बौद्धिक धरातल पर बुद्धिजीवी व श्रमजीवी देश में प्रचलित है. शिक्षा की पराकाष्ठा को दूर करने के लिए सामाजिक शिक्षण संस्थान को जागरूकता परिचय देना होगा. उन्होंने कहा कि योग्य मुख्यमंत्री के विचारधारा में योग्य व्यक्ति को प्रश्रय नहीं देना हत्या के समान है. शंकराचार्य ने क्षमतावान को आगे लाने की वकालत करते हुए कहा कि हर व्यक्ति स्वभाव से स्वस्थ होता है. रोग आगंतुक है. मिथ्या आहर विहार से रोग की उत्पत्ति होती है. हमारे श्रोत पृथ्वी, पानी, हवा व प्रकाश इन चारों स्रोतों को विकृत कर दिया गया है. इससे लोग बीमार पड़ रहे हैं. भूमि अधिग्रहण के सवाल पर उन्होंने कहा कि चिंतन करना शासनतंत्र का दायित्व है. ऐसा करना चाहिए कि उसर व मरुभूमि भी उर्वर बन जाय. महिला सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश का इतिहास रहा है कि मातृ शक्ति को कभी कुचल कर नहीं रखा गया है.

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