युवा आधुनिक शिक्षा हासिल करें, लेकिन धार्मिक शिक्षा को न भूलें : इमारत-ए-शरिया

Edited by Nikhil Anurag
Updated:
विज्ञापन

इमारत-ए-शरिया

Imarat-e-Sharia News : इमारत-ए-शरिया ने समस्तीपुर में आयोजित दावत व इस्लाह यात्रा के समापन पर युवाओं और अभिभावकों से आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा को भी अपनाने की अपील की. संस्था ने नैतिक मूल्यों, सामाजिक सुधार और चरित्र निर्माण में दीन की शिक्षा की अहम भूमिका पर जोर दिया.

विज्ञापन

Imarat-e-Sharia News : (अजीत कुमार की रिपोर्ट) बिहार, झारखंड, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के मुसलमानों की प्रमुख धार्मिक, सामाजिक एवं न्यायिक संस्था इमारत-ए-शरिया द्वारा शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को लेकर चलाया जा रहा अभियान लगातार जारी है. संस्था विभिन्न जिलों में मुस्लिम युवाओं और अभिभावकों के बीच यह संदेश पहुंचा रही है कि आधुनिक एवं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा को भी जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं. संस्था का मानना है कि आधुनिक शिक्षा और दीन की समझ का संतुलन ही नई पीढ़ी को बेहतर नागरिक और जिम्मेदार इंसान बना सकता है.

10 से 17 जून तक चला दावत व इस्लाह अभियान

इसी अभियान के तहत समस्तीपुर जिले में 10 जून से 17 जून 2026 तक दावत व इस्लाह यात्रा का आयोजन किया गया. इसकी जानकारी इमारत-ए-शरिया के प्रधान कार्यालय फुलवारी शरीफ से जारी की गई. बताया गया कि यह यात्रा अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी के मार्गदर्शन तथा नाजिम इमारत-ए-शरिया हजरत मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सईदुर्रहमान कासमी के निर्देश पर आयोजित की गई थी.

धार्मिक जागरूकता और सामाजिक सुधार पर हुआ संवाद

इमारत-ए-शरिया के सहायक नाजिम मौलाना कमर अनीस कासमी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने समस्तीपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया. इस दौरान धार्मिक जागरूकता, सामाजिक सुधार, पारिवारिक जीवन, नैतिक मूल्यों तथा आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा के महत्व पर लोगों को जागरूक किया गया. यात्रा का समापन 17 जून को मिसरी घरारी स्थित जामिया मस्जिद में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ.

आधुनिक शिक्षा के साथ दीन की समझ भी जरूरी

समापन सभा को संबोधित करते हुए मौलाना कमर अनीस कासमी ने कहा कि वर्तमान समय में मुस्लिम समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई पीढ़ी को धार्मिक मूल्यों से जोड़कर रखना है. उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को आधुनिक एवं तकनीकी शिक्षा अवश्य प्राप्त करनी चाहिए तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में जाकर उच्च शिक्षा हासिल करनी चाहिए, लेकिन इसके साथ धार्मिक शिक्षा को भी जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है.

अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

उन्होंने कहा कि जिस युवा के पास आधुनिक शिक्षा के साथ दीन की समझ होगी, वही समाज और राष्ट्र के लिए बेहतर भूमिका निभा सकेगा. अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा दिलाने के साथ-साथ कुरआन, हदीस, इस्लामी शिक्षाओं और नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराएं. धार्मिक शिक्षा व्यक्ति के चरित्र निर्माण की आधारशिला है और यही शिक्षा उसे बुराइयों तथा गलत रास्तों से बचाती है.

इसे भी पढ़ें : असम में शहीद वायुसेना अधिकारी शुभम कुमार के मुआवजे पर पिता ने उठाया सवाल, बोले- माता-पिता के अधिकारों की भी हो रक्षा

विज्ञापन
Nikhil Anurag

लेखक के बारे में

By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन