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समस्तीपुर : घर पैसा भेजने की सूचना का रहे थे इंतजार, फोन आते ही उजड़ गयी दुनिया

Updated at : 09 Dec 2019 8:32 AM (IST)
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समस्तीपुर : घर पैसा भेजने की सूचना का रहे थे इंतजार, फोन आते ही उजड़ गयी दुनिया

सिंघिया (समस्तीपुर) : सिंघिया प्रखंड का हरिपुर लिलहौल, फुलहारा और ब्रह्मपुरा गांव मजदूरों के परिजनों के क्रंदन से सहम उठे. इन गांवों में हर तरफ महिलाओं की चीत्कार सुनाई दे रही थी. तीनों गांवों के एक साथ आठ कमाऊ पुत्र लापरवाही की आग की भेंट चढ़ गये. इन मजदूरों के परिजनों को महीना पूरा होने […]

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सिंघिया (समस्तीपुर) : सिंघिया प्रखंड का हरिपुर लिलहौल, फुलहारा और ब्रह्मपुरा गांव मजदूरों के परिजनों के क्रंदन से सहम उठे. इन गांवों में हर तरफ महिलाओं की चीत्कार सुनाई दे रही थी. तीनों गांवों के एक साथ आठ कमाऊ पुत्र लापरवाही की आग की भेंट चढ़ गये.

इन मजदूरों के परिजनों को महीना पूरा होने पर बैंक अकाउंट में पैसे आने का इंतजार था. पल-पल वे उनके फोन की प्रतीक्षा कर रहे थे कि सैलरी मिल गयी है और पैसा खाते में भेज दिया है, लेकिन उन्हें क्या पता था कि रविवार की सुबह उन्हें पैसे की जगह अपने लाल को सदा के लिए खो देने की सूचना लेकर आयेगी.

फैक्टरी की इस आग ने आठ माताओं की गोद सुनी कर दी. पिता की बुढ़ापे की लाठी छीन गयी. बहनों से उनके भाई छीन लिये. हरिपुर लिलहौल के मो साजिद को तो किसी में ढाढ़स बधाने तक की हिम्मत नहीं थी. उनके दो पुत्र 25 वर्षीय मो साजिद और 18 वर्षीय मो वाजिद को सदा के लिए उनसे जुदा कर दिया. साजिद कातर भाव से शून्य को निहार रहे थे. उनकी आंखों के आंसू भी सूख चुके थे. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था.

लोगों का कहना था कि यहां के 20 मजदूर दिल्ली में काम करने गये हुए हैं. अन्य मजदूरों के परिजन भी बहुत डरे-सहमे थे. उन्हें किसी अनहोनी की आशंका सता रही थी. दिल्ली में जिसके जो भी संपर्क के लोग थे, उनके मोबाइल फोन पर हालत जानने की कोशिश की जा रही थी. किसी को वहां की पूरी और सही जानकारी नहीं मिल रही थी. मजदूरों के परिजनों के साथ-साथ गांव के लोग भी बेचैन थे़ देर शाम तक सिर्फ आठ मजदूरों के अगलगी की घटना में मौत की सूचना मिली थी.

गांव में नहीं जले चूल्हे : हरिपुर लिलहौल, फुलहारा व ब्रह्मपुरा गांवों के एक साथ मौत मजदूरों की मौत खबर मिलने के बाद मजदूरों के घरों के साथ-साथ आसपास के घरों में रविवार को चूल्हे नहीं जले.पड़ोसियों के साथ-साथ पूरे गांवों के लोग इन गरीब मजदूरों के घर पर पहुंचकर रोते-बिखलते परिजनों को संभालने और समझाने में जुटे थे. इस दौरान कई पंचायत प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. सभी परिजनों को ढाढ़स बधाने में जुटे थे.

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