शारदीय नवरात्रि आज से शुरू, हाथी पर सवार होकर आयेंगी माता दुर्गा
Updated at : 29 Sep 2019 12:54 AM (IST)
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समस्तीपुर : शारदीय नवरात्रि आज से है. यह नौ दिनों तक चलेगा. वैसे तो मां दुर्गा की सवारी सिंह है. परंतु इस बार पहला नवरात्र रविवार को पड़ा है. इसलिए माता का आगमन हाथी पर होगा. शास्त्रों के मुताबिक यह शुभ फलदायक है. ज्योतिषाचार्य पं. जयशंकर झा कहते हैं कि आश्विन शुक्ल पक्ष की परिवा […]
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समस्तीपुर : शारदीय नवरात्रि आज से है. यह नौ दिनों तक चलेगा. वैसे तो मां दुर्गा की सवारी सिंह है. परंतु इस बार पहला नवरात्र रविवार को पड़ा है. इसलिए माता का आगमन हाथी पर होगा. शास्त्रों के मुताबिक यह शुभ फलदायक है. ज्योतिषाचार्य पं. जयशंकर झा कहते हैं कि आश्विन शुक्ल पक्ष की परिवा तिथि को कलश स्थापना होती है.
यह तिथि जिस दिन पड़ेगा उसी के मुताबिक मां की सवारियां भी बदल जाती हैं. इसलिए हर दिन के लिए माता के आगमन की अलग-अलग सवारी शास्त्रों में बताये गये हैं. देवी के अलग-अलग सवारी पर आने के अलग-अलग शुभ-अशुभ फल भी बताये गये हैं. इस बार रविवार को कलश स्थापित होगा इसलिए माता का आगमन हाथी पर है. मान्यताओं के मुताबिक हाथी सुख-समृद्धि और शक्ति का प्रतीक है.
देवी का आगमन इसी से हो रहा है इसलिए इस बार का नवरात्र शुभ होगा. अच्छी वर्षा होगी. अन्न की कमी नहीं रहेगी. देवी के भक्त सुखी, प्रसन्न और संपन्न रहेंगे. तरक्की करेंगे. शक्ति पीठों, मंदिरों व पूजा-पंडालों में नौ दिनों तक माता के नौ रुपों की पूजा-अर्चना होगी. इसके लिए पुरोहितों ने शनिवार की संध्या से ही तैयारी शुरू कर दी है. शहर के खाटू श्याम मंदिर, काली मंदिर, मन्नीपुर, बड़ी दुर्गा स्थान, कर्पूरी बस पड़ाव, मगरदही घाट समेत अन्य पूजा स्थलों पर पुरोहित पहुंच चुके हैं.
रविवार की अहले सुबह से वे घट स्थापना की प्रक्रिया में जुटेंगे. कई स्थानों पर कलश स्थापना के लिए विधिवत कलश यात्रा निकाली जायेगी. इसके लिए कलशधारण करने वाली कन्याओं को आज ही वस्त्र, चुनरी व घट उपलब्ध करा दिये गये हैं. इधर, अपने घरों में कलश स्थापित कर देवी सप्तशती का पाठ करने वाले श्रद्धालुओं ने भी आवश्यक पूजा सामग्रियों की खरीद की खरीद की. इसके कारण विपरीत मौसम के बावजूद बाजार में चहल-पहल दिखी. भक्तों को बस रविवार के सूर्योदय का इंतजार है.
माता के शैलपुत्री रूप की पूजा आज
नवरात्र के दौरान परिवा तिथि से लेकर नवमीं तक माता दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना की जाती है. पहले दिन कलश स्थापना के बाद माता के पहले रूप शैलपुत्री रूप की पूजा-अर्चना होगी. दुर्गा सप्तशती का पाठ भी आरंभ होगा. माता शैलपुत्री अपने भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं.
व्रती व फलाहारियों ने किया नहाय-खाय: नवरात्र के दौरान निराहार व्रत रख कर स्तुति करने वाले व फलाहारियों ने शनिवार को नहाय-खाय किया. कलश स्थापना के साथ निराहार रहने वाले लगातार नौ दिनों तक माता की पूजा-अर्चना करेंगे. नवमीं तिथि को हवन व दसवीं को जयंती कटने के बाद वे अन्न ग्रहण करेंगे. इसी तरह नौ दिनों तक फलाहार कर माता की स्तुति करने वाले भी दसवीं को जयंतीधारण करने के बाद अन्न-जल करेंगे.
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