कंधों के बजाय ठेले पर निकली राजकिशोर की अर्थी

Published at :10 May 2018 5:31 AM (IST)
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कंधों के बजाय ठेले पर निकली राजकिशोर की अर्थी

समस्तीपुर : बदकिस्मती ने मरने के बाद भी राजकिशोर का पीछा नहीं छोड़ा़ उसे जीवन के अंतिम यात्रा पर चार कंधे भी नसीब नहीं हुआ. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मुसापुर निवासी राजकिशोर की मंगलवार की रात ट्रेन से कट कर मौत हो गयी थी़ पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल से उसके शव को ले जाने के […]

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समस्तीपुर : बदकिस्मती ने मरने के बाद भी राजकिशोर का पीछा नहीं छोड़ा़ उसे जीवन के अंतिम यात्रा पर चार कंधे भी नसीब नहीं हुआ. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मुसापुर निवासी राजकिशोर की मंगलवार की रात ट्रेन से कट कर मौत हो गयी थी़ पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल से उसके शव को ले जाने के लिए परिचितों को एक वाहन तक मुहैया नहीं कराया गया.

थक हार कर राजकिशोर के दो भतीजे शव को ठेला पर लाद कर ही अंतिम संस्कार के लिए ले गये़ इस घटना ने एक बार फिर समस्तीपुर में मानवता को तार-तार किया़ ऐसा लग रहा था कि ठेला पर राजकिशोर का नहीं मानवता का शव जा रहा है़ खैर यह तो समझने वालों के लिए था़ नहीं तो अधिकतर लोग बस एक नजर देखकर ही इस वाक्ये को अनदेखा कर रहे थे़ जिले के सभी आला अधिकारियों के कार्यालय के सामने से गुजरते हुए ठेले पर निकली उसकी अंतिम यात्रा मथुरापुरघाट स्थित श्मशान तक पहुंच गया, लेकिन उसपर किसी की नजर नहीं गयी़

दाह संस्कार के लिए किया चंदा. मृतक का भतीजा छोटू एवं मनोज कुमार के अनुसार राजकिशोर अपने परिवार में अकेला था़ शहर के स्टेशन चौक स्थित एक होटल में काम करके अपना जीवनयापन कर रहा था़ घटना के बाद न तो उसके शव ले जाने के लिए वाहन मुहैया कराया गया और न उसके दाह संस्कार के लिए किसी भी तरह की सरकारी सहायता दी गयी़ बाद में उसने अपने पड़ोसियों से चंदा कर दाह संस्कार की व्यवस्था की.
सीएम के आदेश की हुई अनदेखी. जानकारों के अनुसार सीएम ने अस्पताल से शव ले जाने के लिए हर हाल में नि:शुल्क एंबुलेंस या शव वाहन की व्यवस्था करने का आदेश दे रखा है़ तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं रहने पर किराये की वाहन मुहैया कराने एवं दाह संस्कार की व्यवस्था करने का भी आदेश है़ लेकिन बुधवार को ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला़
पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल से शव ले जाने के लिए नहीं मिला वाहन
दो भतीजों ने गांव में चंदा कर मृतक का किया अंतिम संस्कार
शव ले जाने की नि:शुल्क व्यवस्था यहां लोगों को उपलब्ध करायी जाती है़ मृतक के परिजनों ने वाहन की मांग ही नहीं की़ मैंने स्वयं जीआरपी को फोन कर बुलाया और उसका पोस्टमार्टम कराया़ लेकिन वे शव को अपने घर कैसे ले गये इसकी जानकारी नहीं है़ अगर, वे वाहन मांगते तो उन्हें जरूर उपलब्ध कराया जाता़
डॉ एएन शाही, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल
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