पहले फॉल्ट, फिर टूटा तार

Published at :10 May 2018 5:30 AM (IST)
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पहले फॉल्ट, फिर टूटा तार

समस्तीपुर : गर्मी से जूझ रहे शहरवासियों को बुधवार अहले सुबह बड़ी राहत मिली, लेकिन यह राहत लोगों के लिए आफत भी बन गयी. अहले सुबह तेज आंधी के बाद जितवारपुर व मोहनपुर पावर सब स्टेशन से जुड़े फीडरों की बिजली गुल हो गयी गयी. बिजली गुल रहने से लोगों को खासी परेशानियों का सामना […]

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समस्तीपुर : गर्मी से जूझ रहे शहरवासियों को बुधवार अहले सुबह बड़ी राहत मिली, लेकिन यह राहत लोगों के लिए आफत भी बन गयी. अहले सुबह तेज आंधी के बाद जितवारपुर व मोहनपुर पावर सब स्टेशन से जुड़े फीडरों की बिजली गुल हो गयी गयी. बिजली गुल रहने से लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा. सुबह बिजली न होने से कई क्षेत्रों में पानी सप्लाई प्रभावित रही. मिली जानकारी के अनुसार, मोहनपुर पावर सब स्टेशन से जुड़े 33 केवीए तार में फाॅल्ट उत्पन्न होने के कारण बिजली आपूर्ति बंद रही. जब ग्रिड ने फाॅल्ट दुरुस्त कर मोहनपुर पावर सब स्टेशन को बिजली दी, तो टाउन टू फीडर ब्रेक डाउन में चला गया.

यहां मानव बलों के प्रयास के बाद दोपहर करीब आधे फीडर में शहर के बारह पत्थर में जंफर हटा आपूर्ति बहाल की जा सकी. लेकिन कही भी फाॅल्ट नहीं मिला, जब बिजली दी गयी तो आपूर्ति बहाल हो गयी. लेकिन कुछ ही देर में काशीपुर स्थित वार्ड 7 में एलटी तार टूटने से बिजली गुल हो गयी. जब इसे दुरुस्त किया गया तो शहर बारह पत्थर इलाके में 11 हजार एचटी लाइन की तार टूट गयी, जिससे पूरे टाउन टू फीडर की बिजली आपूर्ति ठप हो गयी. इस फीडर में पूरी तरह बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने में करीब आठ घंटे से भी अधिक समय लगा. वहीं फाॅल्ट दूर होने के बाद भी देर शाम तक बिजली की आंख मिचौनी जारी रहने के कारण उपभोक्ताओं का आक्रोश चरम पर रहा. इधर, जितवारपुर पावर सब स्टेशन से जुड़े 33 केवीए भी ब्रेक डाउन में रहा. करीब 9.20 बजे इससे जुड़े फीडरों में बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी.

लो वोल्टेज से भी उपभोक्ता परेशान
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए लो वोल्टेज सिर दर्द बना हुआ है. लो वोल्टेज के कारण बिजली उपलब्ध रहते हुए भी लोग उसका उपयोग नहीं कर पाते हैं. शहरी क्षेत्र में तो लो वोल्टेज के चलते लोगों को पेयजल की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है. अधिकांश ट्रांसफॉर्मर के अर्थिंग काफी कमजोर हो चुके हैं. वोल्टेज पर्याप्त नहीं मिलने के कारण सब्मर्सिबुल व सामान्य वोटर नहीं चल पाता है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के सिंचाई के लिए लगाये गये मोटर भी लो वोल्टेज के कारण नहीं काम रहा है. बड़े पैमाने पर घरेलू कनेक्शन के नाम पर लिये गये बिजली का उपयोग व्यावसायिक रूप में हो रहा है. वहीं टोका फंसाकर भी बिजली जलाये जा रहे हैं. बिजली के वितरण में ब्रेक डाउन उपभोक्ताओं के लिए सिर दर्द बन गया है. बिजली गुल रहने पर सप्लाई केंद्र से पूछे जाने पर उपभोक्ताओं को सीधे एक ही जवाब मिलती है. ब्रेक डाउन है. सप्लाई के लिए लगाये तार भी लगातर बिजली की सप्लाई होने पर गर्म हो गल कर गिर जा रहे हैं. इसे ठीक करने के लिए घंटों बिजली की आपूर्ति ब्रेक डाउन में बंद रहती है. बिजली के ट्रांसफार्मरों को प्राय: स्वीच खराब है. कहीं भी गड़बड़ी आने पर पूरे क्षेत्र की बिजली काटकर उसके बाद उसे ठीक किया जाता है. सप्लाई केंद्र से लेकर हर जगह ब्रेकर, पैनल आदि खराब होने से भी परेशानी उत्पन्न हो रही है.
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