पांच साल में 20% कम हुई कृषि योग्य भूमि

मोरवा : प्रखंड क्षेत्र में खेती योग्य भूमि में तेजी से कमी हो रही है. लगातार बनते मकान, फोरलेन सड़क का निर्माण व टुकड़ों में बंटती जमीन से विगत पांच सालों में इसमें 20 फीसदी की कमी बतायी जा रही है. कृषि योग्य भूमि टुकड़ों में इस कदर बंट चुका है कि अब उस पर […]
मोरवा : प्रखंड क्षेत्र में खेती योग्य भूमि में तेजी से कमी हो रही है. लगातार बनते मकान, फोरलेन सड़क का निर्माण व टुकड़ों में बंटती जमीन से विगत पांच सालों में इसमें 20 फीसदी की कमी बतायी जा रही है. कृषि योग्य भूमि टुकड़ों में इस कदर बंट चुका है कि अब उस पर खेती करना आसान नहीं रहा है. प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक मोरवा प्रखंड क्षेत्र में ऊपरी भाग में 21 हजार नौ सौ हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है. नदी किनारे और चौर की जमीन का आंकड़ा इससे अलग है. विगत पांच सालों में करीब चार सौ पचास एकड़ में विभिन्न तरह के मकान बन गये, तो छह सौ एकड़ में मिट्टी कटाई से खेत खेती करने लायक नहीं रहा.
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