प्रतिबंधित श्रेणी की दो दवाओं की बिक्री पर पाबंदी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Sep 2017 11:59 AM (IST)
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समस्तीपुर : 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को डायरिया, टायफाइड, निमोनिया एवं संक्रमण संबंधी बीमारी से बचाव के लिए बाजारों में धड़ल्ले से बेची जा रही ओफ्लोक्सासीन व लिवोफ्लोक्सासीन ग्रुप की दवाओं की खरीद, बिक्री व भंडारण पर राज्य औषधि नियंत्रक ने रोक लगा दी है. औषधि नियंत्रक ने इससे संबंधित दिशा-निर्देश सभी […]
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समस्तीपुर : 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को डायरिया, टायफाइड, निमोनिया एवं संक्रमण संबंधी बीमारी से बचाव के लिए बाजारों में धड़ल्ले से बेची जा रही ओफ्लोक्सासीन व लिवोफ्लोक्सासीन ग्रुप की दवाओं की खरीद, बिक्री व भंडारण पर राज्य औषधि नियंत्रक ने रोक लगा दी है. औषधि नियंत्रक ने इससे संबंधित दिशा-निर्देश सभी सहायक औषधि नियंत्रक व औषधि निरीक्षक को जारी किया है. प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री संबंधी मामले पाये जाने पर ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है.
बताते चलें कि ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा बच्चों की बीमारी में इस ग्रुप की दवा के उपयोग को हानिकारक बताया गया था. बावजूद इसके बाजारों में धड़ल्ले से प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जा रही थी.
विभिन्न शहरों में इन दवाओं की बिक्री होने का मामला सामने आने के बाद अब पत्राचार किया गया है. जानकारी के मुताबिक, इन दवाओं के उपयोग से बच्चों की हड्डी एवं नसों के कमजोर होने के साथ ही कई तरह की विकृति आने का खतरा बताया गया है. राज्य औषधि नियंत्रक ने उक्त ग्रुप के फॉरमुलेशन व दवा की बिक्री पर रोक लगाने का जारी किया है. शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इन दवाओं का उपयोग खतरनाक है.
हड्डी व नसों के कमजोर होने से छोटे बच्चों में कई तरह की शारीरिक विकृति होने की संभावना भी कई गुणा बढ़ जाती है. गंभीर स्थिति में अधिक दवा का अधिक डोज जानलेवा भी साबित हो सकता है. वर्ष 1994 एवं 1995 में ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने क्यूलोलिन युक्त व हेलोजेनेटेड इन दवाओं को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताते हुए प्रतिबंधित श्रेणी में डाला गया था. बावजूद इसके इन दवाओं की बिक्री बेरोक-टोक की जा रही थी. सीएस अवध कुमार कुमार ने बताया कि राज्य औषधि नियंत्रक द्वारा ओफ्लोक्सासीन व लिवोफ्लोक्सासीन ग्रुप की दवा बच्चों की बीमारी में उपयोग पर रोक लगाने का दिया गया है. इन दवाओं की बिक्री संबंधी शिकायत मिलने पर नियमानुकूल कार्रवाई की जायेगी.
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