जल नल योजना बनी दिखावा, लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

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जल नल योजना बनी दिखावा, लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

प्रखंड क्षेत्र की दो पंचायतों को मिलाकर एक नगर पंचायत बनाया गया है, जबकि ग्रामीण इलाके में कुल 12 ग्राम पंचायतें शामिल हैं.

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शिकायत के बाद भी विभाग मौन

नवहट्टा. प्रखंड क्षेत्र की दो पंचायतों को मिलाकर एक नगर पंचायत बनाया गया है, जबकि ग्रामीण इलाके में कुल 12 ग्राम पंचायतें शामिल हैं. लेकिन किसी भी पंचायत या नगर पंचायत क्षेत्र में जल नल योजना का वास्तविक लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. स्थिति इतनी बदतर है कि एक जलमीनार (टंकी) से मुश्किल से दस परिवारों को भी शुद्ध पेयजल पीने योग्य पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है. कहीं सालों से टंकी की सफाई नहीं हुई है, कहीं बिजली का रिचार्ज खत्म है तो कहीं वाटर प्यूरीफायर मशीनें महीनों से खराब पड़ी है.

ग्रामीणों का कहना है कि न तो विभागीय अधिकारी स्थिति की सुधि ले रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधियों को इसकी चिंता है. कई बार ग्रामीण स्तर पर लोगों ने जेई और एसडीओ को शिकायत की, लेकिन पीएचईडी विभाग के इन अधिकारियों ने शिकायतों को कभी गंभीरता से नहीं लिया. नगर पंचायत निवासी नारायण सिंह ने बताया कि उन्होंने दर्जनों बार जेई से लेकर पटना कार्यालय तक शिकायत की, लेकिन अब तक किसी ने समाधान नहीं किया. उनका कहना है कि पंप की स्थिति खराब है और जिस संवेदक ने कार्य किया, उसने बहाल ऑपरेटरों को महीनों से मासिक भत्ता भी नहीं दिया है.

इधर डरहार पंचायत समेत कई जगहों पर जलमिनारों की स्थिति अत्यंत दयनीय है. शाहपुर पंचायत के रामजी टोला और बरहारा वार्ड संख्या दो, हाटी, कैदली, तथा नौला के जलमीनारों से भी शुद्ध पेयजल की पूरी तरह आपूर्ति बंद है. ग्रामीणों में विभाग की इस उदासीनता को लेकर गहरा आक्रोश है. लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे. इस संबंध में जब पीएचईडी जेई भारती से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब देने से इंकार करते हुए कहा कि शीघ्र मरम्मत का कार्य करवाते हैं व फोन काट दिया.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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