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प्रस्तावित हवाई अड्डा बना मवेशियों का चारागाह

Updated at : 22 Nov 2025 5:52 PM (IST)
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प्रस्तावित हवाई अड्डा बना मवेशियों का चारागाह

प्रस्तावित हवाई अड्डा बना मवेशियों का चारागाह

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प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा हवाई मार्ग से आज भी है वंचित, जमीन अधिग्रहण का कार्य भी अधर में 12.08891 एकड़ अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण की मिल गयी है स्वीकृति सहरसा . किसी भी शहरी क्षेत्र के विकास में हवाई मार्ग का होना एक आवश्यक कड़ी है. हवाई मार्ग से जुड़े शहर का विकास द्रूत गति से होता है व इससे आसपास के क्षेत्र का भी काफी विकास होता है. रोजी रोजगार से लेकर पर्यटकों के आने व मरीजों का समय पर उपचार होने से जानमाल की भी सुरक्षा होती है. लेकिन उड़ान योजना में शामिल होने के बाद भी जिला मुख्यालय स्थित हवाई अड्डे पर आज भी धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो सका है. जबकि इसके विकास को लेकर विभिन्न टीमों द्वारा जांच के बाद जमीन अधिग्रहण की स्वीकृति तक दे दी गयी है. हवाई अड्डा के रनवे के विस्तार के लिए 12.08891 एकड़ अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण को हरी झंडी मिल गयी है. इस विस्तार के लिए अनुमानित मुआवजा राशि 147 करोड 76 लाख 56 हजार 180 रुपये निर्धारित की गयी है. इसके बावजूद धरातल पर काम तक शुरू नहीं हो सका है. यहां से नियमित उड़ान की लोग कल्पना ही कर रहे हैं. जबकि यहां से सौ किलोमीटर दूर दरभंगा से नियमित उड़ान संभव हो गया. सौ किलोमीटर दूर पूर्णियां से भी अब हवाई जहाज उड़ान भर रहा है. लेकिन सहरसा वासियों की आस अब तक पूरी नहीं हो सकी. वहीं हवाई सेवा शुरू करने को लेकर ओएलएस सर्वे का काम पिछले महीने संपन्न कर लिया गया है. जल्द ही सामाजिक सर्वेक्षण के लिए पटना से टीम आने वाली है. जिले से 19 सीटर विमान सेवा शुरू करने की योजना है. हवाई सेवा शुरू होगी तो लोगों को रेल, सड़क के बाद आवागमन के लिए एक और हवाई मार्ग विकल्प के रूप में मिल जायेगा. हवाई मार्ग के माध्यम से कम समय में लोग सफर कर सकेंगे. बीमार मरीजों के लिए यह जीवन रक्षक साबित होगा. साथ ही यह रोजगार का भी माध्यम बनेगा. जमीन अधिग्रहण का काम भी नहीं हुआ है शुरू निकट के दरभंगा एवं पूर्णियां में हवाई सुविधा लोगों को उपलब्ध हो गयी है. लेकिन कोसी प्रमंडल मुख्यालय के हवाई अड्डे की उड़ान योजना में शामिल होने के बाद भी काम अब तक शुरू नहीं हो सका है. विधानसभा चुनाव को लेकर जहां जमीन अधिग्रहण का काम भी शुरू नहीं हो सका. वहीं इसके लिए कोई चर्चा नहीं होने से लोगों में संशय बन गया है. कोसी प्रमंडलीय मुख्यालय से हवाई सुविधा मिलने से निकट के नेपाल से भी लोग इसका लाभ उठा सकते हैं. लोगों को अब इसकी कमी खल रही है. हवाई अड्डा बना मार्निंग वॉक व मवेशियों के चारे की जगह जिले के प्रशासनिक कार्यालयों एवं वरीय अधिकारियों के आवासीय क्षेत्र के बीच स्थित हवाई अड्डा इन दिनों मार्निंग वाॅक एवं वाहन ड्राइव सीखने की जगह बन गयी है. वहीं आजकल पुलिस भर्ती के लिए दौड़ लगाने वाले युवाओं की जगह भी बनकर रह गयी है. जब कभी बड़े अधिकारी, मंत्री, मुख्यमंत्री या फिर प्रधानमंत्री का जिले में कार्यक्रम होता है तो जिला प्रशासन को हवाई अड्डे की सुधि आती है. आनन फानन में सफाई एवं रनवे का जायजा लेते दुरूस्त किया जाता है. लेकिन उनके जाते ही फिर यह जगह उपेक्षित रहती है. दिन भर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है. उपेक्षा का दंश क्षेल रहे इस हवाई अड्डे का आज भी उद्धार का इंतजार है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw is a contributor at Prabhat Khabar.

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