बाढ़ में धान की फसल नष्ट, सहुरिया पंचायत के ठड़िया में बाढ़ के पानी से धंसा डायवर्सन पुल

Updated at : 19 Jul 2020 8:05 AM (IST)
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बाढ़ में धान की फसल नष्ट, सहुरिया पंचायत के ठड़िया में बाढ़ के पानी से धंसा डायवर्सन पुल

बाढ़ में धान की फसल नष्ट, सहुरिया पंचायत के ठड़िया में बाढ़ के पानी से धंसा डायवर्सन पुल

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सहरसा : बारिश नहीं होने से जहां आम लोग थोड़ी सी राहत की सांस ले रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर बाढ़ के पानी से नष्ट हुए सैकड़ों एकड़ धान की फसल से किसान काफी परेशान दिख रहे हैं. क्षेत्र के ईटहरी, रसलपुर, घुड़दौर, महारस, सहुरिया, सरबेला एवं जमालनगर के दर्जनों गांव के धान की फसल नष्ट हो गयी है. जिससे किसान काफी परेशान दिख रहे हैं. जानकारी हो कि पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ के जल स्तर में वृद्धि होने के कारण खेत खलिहान में बाढ़ की पानी आने से धान की फसल चौपट हो गयी.

मुखिया संघ अध्यक्ष मनोज कुमार यादव बताते हैं कि क्षेत्र में धान की फसल बाढ़ के पानी से नष्ट हो गया है. जिस कारण किसान थोड़े हताश दिख रहे हैं. किसान धान की खेती इस बार महाजन से सूद पर कर्ज लेकर किए थे. लेकिन बाढ़ की मार ने उनकी कमर तोड़ डाली. उन्होंने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाये. वहीं डायवर्सन पुल निर्माण में संवेदक की लापरवाही उस वक्त सामने आयी, जब बाढ़ के पानी के बहाव में सहुरिया पंचायत के ठड़िया डायवर्सन पुल धंस गया. ग्रामीण बताते हैं कि इस पुल को बनाने में भारी अनियमितता बरती गयी. जिस कारण यह पुल 3 से 4 फीट धंस गया है. उन्होंने बताया कि पुल निर्माण के समय कोई भी प्रशासनिक अमला देखरेख के लिए नहीं आये. इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्रगुप्त बैठा ने बताया कि जो संबंधित विभाग के लोग हैं, उसे सूचित किया जा रहा है.

नहीं हुई नाव की व्यवस्था: बाढ़ के पानी से घिरे हुए पशुपालक अपने पशुओं के चारे के लिए अथाह पानी में जाकर चारा काट कर लाते हुए लगातार देखे जा रहे हैं. जबकि सीओ के द्वारा नाव की व्यवस्था नहीं की गयी. कई दिनों से मनिया गांव का संपर्क भंग है. सड़क मार्ग पानी में डूब गया. वहीं बाढ़ के पानी से बेपरवाह बच्चों के माता-पिता दिख रहे हैं. क्योंकि डायवर्सन पुल के समीप दर्जनों बच्चे बाढ़ के पानी में नहाते हुए नजर आ रहे हैं. जिससे कभी भी आकस्मिक घटना हो सकती है. इस पूरे प्रकरण में अंचल अधिकारी अक्षयवट तिवारी ने बताया कि सरकारी नाव नहीं है. निजी नाव का भी निबंधन नहीं है. अधिकांश नाव निबंधन कराने लायक भी नहीं है. सभी पशुओं के घास काटने वाला नाव है. एमभीआइ ने भी रिजेक्ट कर दिया है. उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा लगातार कर्मियों द्वारा करवाया जा रहा है. अभी स्थिति ठीक है. खेत खलियान के लिए नाव की व्यवस्था नहीं हो पायेगी. क्योंकि पानी का जलस्तर घटने लगा है. दो-तीन दिनों में पानी हट जायेगा. उन्होंने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए जल्द ही सामुदायिक किचन का निर्माण किया जायेगा.

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