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संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के संकल्प को पूरा करके ही लेंगे दम: अंगद कुशवाहा

Updated at : 19 May 2025 6:18 PM (IST)
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संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के संकल्प को पूरा करके ही लेंगे दम: अंगद कुशवाहा

संकल्प को पूरा करके ही लेंगे दम: अंगद कुशवाहा

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सहरसा . राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष अंगद कुशवाहा ने सोमवार को संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार की लड़ाई को जनआंदोलन का स्वरूप दिये जाने को लेकर प्रेस प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की. उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकार, परिसीमन सुधार की लड़ाई को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा. जब तक बिहार व उत्तर भारत के राज्यों को जनसंख्या के आधार पर न्यायोचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 82 व अनुच्छेद 170 के तहत प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा व विधानसभा सीटों के परिसीमन का प्रावधान है. लेकिन 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से परिसीमन को 25 वर्षों के लिए फ्रीज कर दिया गया. यह रोक 2026 तक के लिए बढ़ा दी गयी. इससे उत्तर भारत विशेषकर बिहार जैसे राज्यों को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में औसतन 10 लाख की आबादी पर एक लोकसभा सीट है. जबकि उत्तर भारत में यह संख्या लगभग 31 लाख है. इससे ना केवल बिहार का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हुआ है. बल्कि विकास के संसाधनों का भी असमान वितरण हुआ है. सांसद निधि का उदाहरण देते उन्होंने बताया कि समान निधि राशि अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में कम प्रभावी होती है. जिलाध्यक्ष अर्चना आनंद ने कहा कि 1976 में परिसीमन को स्थगित नहीं किया गया होता तो आज बिहार को 40 की बजाय लगभग 60 लोकसभा सीटें प्राप्त होती. उन्होंने दक्षिण के राज्यों द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर परिसीमन का विरोध करने को गलत बताते कहा कि जब दक्षिण की आबादी बढ़ रही थी तब उन्हें लाभ दिया गया. जब उत्तर भारत की बारी आयी तो उसे वंचित कर दिया गया. आनंद ने यह भी कहा कि इस असमानता के कारण अनुसूचित जाति, जनजाति एवं प्रस्तावित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को भी वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा. यही कारण है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार अभियान को हर घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी के तीन दिवसीय राजनीतिक मंथन शिविर में इस आंदोलन को राज्यव्यापी रूप देने का निर्णय लिया है. इसी क्रम में आगामी 25 मई को रोहतास के विक्रमगंज एवं आठ जून को मुजफ्फरपुर में संवैधानिक अधिकार, परिसीमन सुधार महारैली का आयोजन किया जा रहा है. अन्य जिलों में भी ऐसे कार्यक्रमों की योजना बनाई गयी है. जिसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी. प्रेस वार्ता में जिला प्रधान महासचिव सीएम झा बौआ, गोपाल तिवारी, संगीता देवी, मो कमालुद्दीन, अविनाश सिन्हा सहित अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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