मकई खेत बन रहा है हत्या के बाद शव छुपाने की सुरक्षित जगह

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मकई खेत बन रहा है हत्या के बाद शव छुपाने की सुरक्षित जगह

मकई खेत बन रहा है हत्या के बाद शव छुपाने की सुरक्षित जगह

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हत्या जैसे घटना को अंजाम देने में नशा एक प्रमुख कारण प्रभात फॉलोअप सौरबाजार . घरेलू और मामूली आपसी विवाद में भी लोग हत्या जैसे जघन्य वारदात को अंजाम दे रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है. हाल के दिनों में देखा जा रहा है कि लोग अपने परिजनों और दोस्तों की हत्या कर शव छुपाने के लिए मकई के खेत का सहारा ले रहे हैं. लेकिन पुलिस की नजर भी उन झाड़ीनुमा मकई के खेत तक पहुंच जा रही है और शव को वहां से निकाल कर कार्रवाई की जा रही है. आपसी और मामूली विवाद में हत्या जैसे घटना को अंजाम देने में नशा एक प्रमुख कारण माना जाता है. बिहार में नशीली पदार्थों की बिक्री और सेवन पर सरकार ने भले हीं प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन वर्तमान समय में नशीली पदार्थों का चोरी छिपे लोग सेवन कर अपने परिजनों, अपने दोस्तों या फिर अन्य लोगों के साथ गलत हरकत करने के साथ-साथ हिंसक घटनाओं को भी अंजाम दिया जा रहा है. हत्या समेत अपराधिक घटनाओं में वृद्धि के कारणों में एक प्रमुख कारण नशा का प्रयोग भी शामिल है. हाल में दो हत्या की घटनाए जो महज दो दिन के अंतराल पर घटित हुई है. जिसमें पहली घटना बैजनाथपुर थाना क्षेत्र के गम्हरिया निवासी शंकर यादव के हत्या का मामला भी नशीली पदार्थों की तस्करी और सेवन करने वाले लोगों से जुड़ा हुआ है, इनके साथियों द्वारा ही पुरानी रंजिश में इनकी हत्या कर शव को बैजनाथपुर में हीं मकई के एक खेत में छुपा दिया गया था. जबकि सौरबाजार थाना क्षेत्र के सहुरिया पश्चिमी पंचायत के धमसैना गांव में नवविवाहिता निभा कुमारी के पति विकास कुमार द्वारा परिवारिक विवाद में धारदार हथियार से पत्नी की हत्या कर इनके शव को भी मकई के खेत में छुपाने का प्रयास किया जा रहा था. जिसे स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस द्वारा खोजकर निकाला गया. मृतक के परिजनों की मानें तो यदि सौरबाजार पुलिस सजग रहती और निभा की शिकायत पर संज्ञान लेकर काम करती तो निभा की हत्या टाली जा सकती थी. परिजनों के अनुसार निभा और विकास की प्रेम प्रसंग में अंर्रतजातीय विवाह के कारण उनके ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा उन्हें बराबर प्रताड़ित करने के साथ साथ मारपीट भी की जाती थी. जिसकी शिकायत लेकर निभा कई बार थाना भी आयी थी और आवेदन भी दिया था. लेकिन पुलिस उसकी शिकायत की अनदेखी करती गयी. महिला हेल्प डेस्क में भी उनके द्वारा आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी गयी थी. लेकिन गृह विभाग द्वारा थाना में महिला की सुरक्षा और मदद के लिए स्थापित महिला हेल्प डेस्क भी उसकी कोई मदद नहीं कर पायी. पुलिस से कोई मदद नहीं मिलने पर निभा के मायके पक्ष और समाज के लोगों से भी न्याय की गुहार लगाई थी. लेकिन मायके पक्ष और समाज की मर्जी के विरुद्ध अपनी मर्जी से प्रेम प्रसंग में अंर्तजातीय शादी करने के कारण ये लोग भी उनसे खफा थे. अंत में कलयुगी सिरफिरे पति ने उसकी हत्या कर दी. दोनों मामले में सौरबाजार और बैजनाथपुर थाना पुलिस कार्रवाई कर रही है. लेकिन अब तक मृतक के परिजनों को उचित न्याय नहीं मिल पाया है.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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