सहरसा में विराटपुर का मां चंडिका स्थान, जहां सच्चे मन से मांगी हर मुराद होती है पूरी

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विराटपुर का मां चंडिका स्थान,

Aaj Ka Darshan: सहरसा के विराटपुर स्थित मां चंडिका स्थान को कोसी क्षेत्र का प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: सहरसा जिले के सोनवर्षा प्रखंड स्थित विराटपुर का मां चंडिका स्थान श्रद्धा, शक्ति साधना और अटूट आस्था का प्राचीन केंद्र है. कोसी क्षेत्र समेत बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां चंडिका की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटते.

शक्ति साधना और तांत्रिक परंपरा का प्राचीन सिद्धपीठ

विराटपुर स्थित मां चंडिका स्थान अपनी धार्मिक महत्ता, तांत्रिक साधना और आध्यात्मिक वातावरण के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर वर्षों पुराना सिद्धपीठ है, जहां मां चंडिका की पूजा विशेष विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न होती है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक अलग आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है.

सुबह-शाम आरती में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती का आयोजन किया जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं. श्रद्धालु दीप प्रज्वलित कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. शाम के समय मंदिर की आकर्षक रोशनी, घंटों की ध्वनि और शंखनाद से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है.

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नवरात्र और अमावस्या पर दिखता है भव्य नजारा

नवरात्र, अमावस्या और दुर्गा पूजा जैसे विशेष अवसरों पर मां चंडिका स्थान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार का दौर चलता रहता है. इन अवसरों पर मां चंडिका का भव्य श्रृंगार किया जाता है और विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं. श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर विशेष पूजा और प्रसाद अर्पित करते हैं.

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Aaj Ka Darshan: धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र

मां चंडिका स्थान धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु न सिर्फ पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि मंदिर की प्राचीन परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण का भी अनुभव करते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि मां चंडिका की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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