...तो क्या घर से नाव पर निकलें

Published at :14 Jul 2016 12:47 AM (IST)
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...तो क्या घर से नाव पर निकलें

दुखड़ा. डीएम साहब, किसी काम का नहीं है यह नगर परिषद वार्ड नंबर 26 व 27 में सालों भर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. बरसात में नाव चलाने की नौबत आ जाती है. लोगों का घर से निकलना दुश्वार हो जाता है. लेकिन नप है, कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता. सहरसा : डीएम […]

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दुखड़ा. डीएम साहब, किसी काम का नहीं है यह नगर परिषद

वार्ड नंबर 26 व 27 में सालों भर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. बरसात में नाव चलाने की नौबत आ जाती है. लोगों का घर से निकलना दुश्वार हो जाता है. लेकिन नप है, कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता.
सहरसा : डीएम साहब, आखिर क्यों झेल रहे हैं इस नगर परिषद को? कब तक झेलेंगे? यह किसी काम का नहीं है. पिछले पांच वर्षों में योजनाओं की बंदरबांट करने के अलावा यह नागरिकों को कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाया है. इसके अधिकारी-कर्मचारी व सभापति पर किसी मंत्री, सांसद या विधायक के आदेश-निर्देश का भी कोई असर नहीं होता है. बरसात का महीना और बेमौसम बरसात के अलावे भी शहर के कई मुहल्ले की सड़कों पर लगभग सालों भर जलजमाव की समस्या बनी रहती है. वहां लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है. बीमारियां फैलती है, लोग संक्रमित होते हैं, सो अलग. लेकिन नप के पास इस समस्या का कोई इलाज नहीं है.
भारतीय नगर में जमा है दो फीट पानी: वार्ड नंबर 26 व 27 का अधिकतर इलाका टापू बना हुआ है. लगभग हर गली में, हर सड़क पर पानी जमा हुआ है. दस दिन पहले हुई छिटपुट बारिश के कारण नहीं, बल्कि यह नजारा सालों भर का है. लगातार बारिश में अधिकतर लोगों के घर में पानी प्रवेश कर जाता है. मुहल्ले के लोगों को घर से निकलने के लिए नाव की व्यवस्था करनी होती है. वार्ड नंबर 26 में प्रवेश करते ही संतोष किराना स्टोर से ही बदहाल स्थिति शुरू हो जाती है. वहां से बच्चू राय के घर तक सड़क पर लगभग दो महीने से एक फीट पानी जमा है. बच्चू राय के घर से आगे पूर्व वार्ड पार्षद नरेश पासवान के घर तक का भी वही हाल है. इन दोनों रास्ते में रह रहे सौ से अधिक परिवार के लोगों के समक्ष विकट स्थिति बनी हुई है.
पूर्व विधायक भी नहीं दिला सके त्राण: मुहल्ले के गणेश कुमार, महेश कुमार, सुभाष प्रसाद, संतोष कुमार सहित अन्य ने कहा कि पूर्व विधायक डॉ आलोक रंजन का आवास भी इसी मुहल्ले में है. उनके विधायक काल में समस्या से निजात मिलने की उम्मीद बनी थी. लेकिन कुछ भी बेहतर नहीं किया जा सका. इधर वार्ड पार्षद व नगर परिषद पदाधिकारी से पानी निकालने के लिए लगातार कहा जाता रहा, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई.
लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने वार्ड पार्षद को आज तक देखा भी नहीं है. इधर वार्ड नंबर 26 की पार्षद मोनिका चौधरी ने पूछने पर कहा कि नगर परिषद पदाधिकारी दिनेश राम से कई बार जलनिकासी के लिए कहा गया. लेकिन वे कहते हैं कि अभी सभी मुहल्ले में पानी जमा है. डैनेज सिस्टम लागू होने तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकती है.
संभल के… गिरे तो डूब जाओगे
इसी मुहल्ले में संतोष किराना स्टोर से पूरब की ओर बढ़ने पर स्थिति और भी विकराल नजर आती है. यहां मोड़ से दस फीट पहले से ही सड़क पर जमे व सड़ांध मार रहे बदबूदार पानी की शुरुआत हो जाती है. दयाशंकर सिंह के घर से बजरंगवली मंदिर तक सड़क पर दो फीट तक पानी जमा है. यही हाल वार्ड नंबर 27 की ओर मुड़ने पर दयाशंकर सिंह के घर से डीलर अशोक भगत के घर तक का है. इन दोनों रास्ते में भी लगभग एक सौ लोगों के परिवार बसे हुए हैं. लंबे समय से जलजमाव ने मुहल्ले की महिलाओं व बच्चों को घर में कैद कर दिया है. जबकि पुरुषों को घुटने से उपर तक कपड़ा समेट, हाथ में जूते-चप्पल ले घर से निकलने व लौटने की नौबत बनी हुई है.
दयाशंकर सिंह के घर से आगे दोनों ओर सड़क पर महीनों से जमा पानी.
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