आसान हो गयी जिंदगी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Feb 2016 6:12 AM (IST)
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कोसी नदी पर बलुआहा सेतु निर्माण के महज ढाई वर्ष बाद क्षेत्र की सूरत बदल गयी है. सड़कें बनीं, स्कूल बच्चों से गुलजार हुए. लोगों को चिकित्सीय सुविधा भी मयस्सर होने लगी. सहरसा नगर : धुंध अब छंट रही है, अब कहीं कुछ रौशनी-सी हो रही है, आज सवेरे से बस्ती में कहीं कत्लेआम का […]
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कोसी नदी पर बलुआहा सेतु निर्माण के महज ढाई वर्ष बाद क्षेत्र की सूरत बदल गयी है. सड़कें बनीं, स्कूल बच्चों से गुलजार हुए. लोगों को चिकित्सीय सुविधा भी मयस्सर होने लगी.
सहरसा नगर : धुंध अब छंट रही है, अब कहीं कुछ रौशनी-सी हो रही है, आज सवेरे से बस्ती में कहीं कत्लेआम का कोई क़िस्सा नहीं हुआ है. गरीब की झोपड़ी में भी शहनाई की आवाज आ रही है…शायर की इन पंक्तियों का मर्म इन दिनों कोसी व कमला-बलान नदी के बीच बसे लाखों लोगों की आबादी में पहुंच कर महसूस किया जा सकता है. कभी कोसी नदी के दो तटबंध के बीच कारागार की जिंदगी जी चुके चेहरे पर खिली मुस्कान उनकी प्रगति की कहानी बयां कर रही है. उनके पास जमीन पहले भी थी, परिवार के साथ रहने के बावजूद शिक्षा, रोजगार व सुविधा को तरस रहे थे.
लेकिन कोसी नदी के ऊपर बन चुके बलुआहा सेतु ने निर्माण के महज ढाई वर्ष बाद क्षेत्र की सूरत ही बदल डाली है. अब नाव की जगह गाड़ियां फर्राटा भर रही हैं, बच्चे स्कूल जाने लगे हैं. सबसे खास बात कि अब मरीजों को ससमय अस्पताल पहुंचाने की सुविधा बहाल हो गयी है. पूर्वजों की संपत्ति को छोड़ परदेशी बन गये लोगों को भी अपनी जमीं प्यारी लगने लगी है.
गांव-गांव में पहुंचती है गाड़ियां
महिषी प्रखंड के बलुआहा घाट तक लोग जिला मुख्यालय से विभिन्न माध्यमों से पहुंचते थे. जिसके बाद नाव व बाद में पैदल मीलों सफर तय करना पड़ता था. सूर्यास्त के बाद नाव का परिचालन भी बंद हो जाता था.
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