जाम से त्रस्त है जनता

Published at :18 Dec 2015 7:43 AM (IST)
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जाम से त्रस्त है जनता

सहरसा नगर : शहर के बंगाली बाजार में प्रस्तावित आरओबी की मांग 18 वर्ष पुरानी है. वक्त-वक्त पर राजनीति के तहत इसे शिलान्यास की खानापूर्ति कर छोड़ दिया गया. स्थानीय स्तर पर ओवरब्रिज की मांग को लेकर कई बार जन आंदोलन हो चुका है. ज्ञात हो कि ओवरब्रिज निर्माण को लेकर राज्य व केंद्र सरकार […]

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सहरसा नगर : शहर के बंगाली बाजार में प्रस्तावित आरओबी की मांग 18 वर्ष पुरानी है. वक्त-वक्त पर राजनीति के तहत इसे शिलान्यास की खानापूर्ति कर छोड़ दिया गया. स्थानीय स्तर पर ओवरब्रिज की मांग को लेकर कई बार जन आंदोलन हो चुका है.
ज्ञात हो कि ओवरब्रिज निर्माण को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के बीच फंसा पेच अब दूर हो रहा है. डीआरएम के अनुसार केंद्र व रेलवे के स्तर पर सभी कवायद पूरी हो गयी है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा दिये जाने वाले राज्यांश के बाद रेलवे निविदा के माध्यम से कार्य शुरू कर देगी.
आने-जाने में होती है परेशानी: अभिनव कुमार कहते हैं कि रोज कॉलेज जाने में परेशानीहोती है. बंगाली बाजार में निर्माण शुरू कराना ही होगा. आनंद मोहन कहते हैं कि बंगाली बाजार में ओवरब्रिज नहीं होने से पूरा शहर जाम की चपेट में आ जाता है.
रेलवे की तरफ से अपनी स्थिति साफ कर देने के बाद राज्य सरकार को आगे आना चाहिए. मो वसीम कहते हैं कि बंगाली बाजार में ओवरब्रिज का निर्माण जल्दी ही शुरु नहीं हुआ तो शहर को महाजाम से मुक्ति दिलाने की कोई तरकीब काम नहीं आयेगी. शम्मी आनंद कहते हैं कि मुझे रोज दो से तीन बार जाम में फंसना ही पड़ता है. बाजार और कार्यालय का चक्कर लगाने में ही पूरा दिन बीत जाता है.
ओवरब्रिज ही इस महाजाम से मुक्ति दिलायेगी. अंजन सिंह कहते हैं कि ओवरब्रिज के बिना सड़क जाम से मुक्ति नहीं मिलेगी, जनप्रतिनिधि इस दिशा में सजग हो ही नहीं पा रहे हैं. आर्यन सिंह कहते हैं कि बंगाली बाजार ढ़ाला पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए एक बार फिर सभी को संघर्ष करना होगा. प्रिया कहती है कि रोज कॉलेज आने-जाने में अगर जाम में फंस गये तो इधर कॉलेज में तो उधर घर में डांट खानी पड़ती है. सभी दल के नेताओं को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा.
मो इलियास कहते हैं कि ओवरब्रिज का कोई अन्य विकल्प नहीं है, सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए. नौशाद कहते हैं कि जाम में समय तो बरबाद होता ही है. साथ में स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. प्रशांत मिश्र कहते हैं कि ओवरब्रिज का नहीं बनना यहां के जनप्रतिनिधियों की नाकामी को दर्शाता है. यह सिर्फ सहरसा की ही नही बल्कि पूरी कोसी की प्रमुख समस्या है.
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