मिथिला में तंत्र साधना, शक्ति व शाक्त उपासना है प्रचलित

Published at :16 Dec 2015 7:13 PM (IST)
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मिथिला में तंत्र साधना, शक्ति व शाक्त उपासना है प्रचलित

मिथिला में तंत्र साधना, शक्ति व शाक्त उपासना है प्रचलित विद्वानों ने कहा, शंकराचार्य के पूर्ववर्ती थे मंडन मिश्रप्रतिनिधि, महिषी (सहरसा)श्री उग्रतारा महोत्सव 2015 के अवसर पर मंडन धाम में कोसी, मिथिला की लोक-संस्कृति, भारती मंडन व पुरातात्विक धरोहर विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने उग्रतारा का प्रादुर्भाव, तंत्र साधना व भारती […]

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मिथिला में तंत्र साधना, शक्ति व शाक्त उपासना है प्रचलित विद्वानों ने कहा, शंकराचार्य के पूर्ववर्ती थे मंडन मिश्रप्रतिनिधि, महिषी (सहरसा)श्री उग्रतारा महोत्सव 2015 के अवसर पर मंडन धाम में कोसी, मिथिला की लोक-संस्कृति, भारती मंडन व पुरातात्विक धरोहर विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने उग्रतारा का प्रादुर्भाव, तंत्र साधना व भारती मंडन पर विस्तृत चर्चा की. प्रो ललितेश मिश्र की अध्यक्षता में संचालित सेमिनार में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो सविता झा खान ने कहा कि गौर काल में तंत्रयान के प्रचलन की चर्चा है. लेकिन मिथिला में तंत्र साधना, शक्ति व शाक्त उपासना प्रस्फुटित व पल्लवित हुआ. मैथिल मानस में शक्ति की अवधारणा अति पौराणिक है. सेंट स्टीफेंस के प्राध्यापक प्रो पंकज मिश्र ने मंडन को शंकराचार्य से पूर्ववर्ती बताते हुए कहा कि मंडन एक साथ कई विषयों के विशारद थे. उनकी कभी शंकराचार्य से शास्त्रार्थ नहीं हुई. शंकराचार्य के अनुयायियों ने शंकर को महिमामंडित करने की मंशा से मंडन से शास्त्रार्थ होने का छद्म प्रयास किया है. जगन्नाथपुर से आये उदयनाथ झा अशोक ने भी मंडन को शंकर से श्रेष्ठ करार देते हुए कहा कि हम सबों कावे मंडन द्वारा प्रतिस्थापित कर्मों को जीवंत बनाये रखने में सहभागिता देनी चाहिए. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स के शोधकर्ता डॉ अक्षय कुमार चौधरी ने आस्था व उत्पत्ति के आयाम में उग्रतारा पर चर्चा की. सेमिनार में डॉ देवशंकर नवीन, डॉ नंदकिशोर चौधरी सहित अन्य ने भी अपने विचारो ंसे उपस्थित सभासद को विभिन्न विधाओं से अवगत कराया. सेमिनार में प्रमंडलीय आयुक्त टीएन बिन्धेश्वरी, जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल, सदर एसडीओ जहांगीर आलम, उग्रतारा न्यास समिति के उपाध्यक्ष प्रमिल कुमार मिश्र, सचिव उदय नारायण चौधरी, ग्रामीण बुद्धिजीवी माणिकचंद्र झा, भावना चौधरी, अमित आनंद, जवाहर ठाकुर सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे. लोगों ने सेमिनार को वैचारिक साहित्यिक ज्ञान के आदान प्रदान का माध्यम बताते इसे और विस्तृत किये जाने की बात कही. फोटो-सेमिनार 11 से 16- सेमिनार में अपने विचार व्यक्त करते वक्ताफोटो- सेमिनार 17- सेमिनार में मौजूद डीएम सहित अन्य

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